Isfurti Singh – पृथ्वीराज चाैहान के जीवन पर आधारित मूवी रिलीज हाेने जा रही है। इसमें उनकी जाति काे लेकर गुर्जर समाज के कुछ लाेगाें ने आपत्ति दर्ज करा रखी है। उनका कहना है कि पृथ्वीराज चौहान को राजपूत शासक नहीं दर्शाया जाए क्याेंकि वह गुर्जर समाज से थे। हालांकि इसका राजपूत समाज लगातार खंडन कर रहा है। इसी कड़ी में रविवार काे एक संगठन ने पृथ्वीराज चाैहान काे राजपूत हाेने का दावा किया और इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में अंग्रेजाें, पाॅलिटिकल पार्टियाें और सरकाराें तक काे दाेषी ठहराया।

श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि समय रहते ये सब बंद नहीं किया गया तो जनजागरण अभियान चलाया जाएगा और जो पार्टी ऐसा करेगी उसके खिलाफ माहौल बनाएंगे। समाज गलत नहीं होता है, कुछ लोग गलत हैं। तथ्य लेकर आएं। फाउंडेशन के केंद्रीय समिति के सदस्य यशवर्धन सिंह झेरली ने कहा राजनीतिक दल राजपूत समाज के महान योद्धाओं और राजा-महाराजाओं को दूसरे समाज को देने के प्रयास में जाति परिवर्तित करने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ लोग राजनीतिक फायदे के लिए गलत बात उछालते हैं। उन बातों से विवाद होता है और यह देश के लिए नुकसानदेय है।

सरकार और राजनीतिक दल भी दोषी
राजपूतों के इतिहास और क्षत्रिय राजा- महाराजाओं को दूसरी जाति का बताए जाने पर श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन के संरक्षक महावीर सिंह सरवड़ी ने कहा इतिहास से छेड़छाड़ के लिए राजनीतिक दल और राज्य सरकारें दोषी हैं। इसके लिए इतिहास के जानकारों को एकसाथ बैठना चाहिए। केवल फिल्मों में ही नहीं, किताबों में भी राजपूतों के इतिहास से छेड़छाड़ की गई है। पृथ्वीराज चौहान को गुर्जर क्षेत्र से जोड़कर गुर्जर घोषित करने का षड्यंत्र चल रहा है।

उधर, श्री क्षात्र फाउंडेशन के महावीर सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए गुर्जर नेता और मिहिर आर्मी चीफ हिम्मत सिंह गुर्जर ने कहा …जब-जब समाज शिक्षित हुआ है तब-तब उसने इतिहास को देखा है और गलती कहां हुई है? उसमें सुधार किया है। यह भी एक सुधार है। गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज और गुर्जर सम्राट पृथ्वीराज चौहान गुर्जर समुदाय के थे। राणा पूंजा भील थे और रहेंगे..13वीं शताब्दी के बाद अस्तित्व में आने वाले लोग इतिहास जानकारी न दें। गुर्जर,जाट,सिख मराठा मीणा और भील आदि किसान कबीलाई कौम राजाओं का शासन रहा है, ये सर्वविदित है।