Deepika jangir: माचाड़ी कस्बे के सीनियर सेकेंडरी विद्यालय के खेल मैदान में मीणा समाज,सैनी समाज, ब्राह्मण समाज के साथ-साथ अन्य समाजों द्वारा क्रांति दूत सावित्रीबाई फुले एवं संविधान सभा के सदस्य व आदिवासियों में राजनीति चेतना के नायक जयपाल सिंह मुंडा की जयंती सोमवार की शाम खेल मैदान में शुरू कर मनाई गई। महिला जागृति की क्रान्ति दूत सावित्री बाई फूले एवं संविधान सभा के सदस्य व आदिवासियो में राजनीतिक चेतना के नायक जयपाल सिंह मुंडा की जयंती के अवसर पर जिला परिषद सदस्य एवं पूर्व सरपंच गोकुल राम मीणा की अध्यक्षता में विचार गोष्टी का आयोजन कर श्रृद्धांजलि दी गई।

गोष्टी में मुख्यवक्ता के तौर पर बाबू शोभाराम राजकीय कला महाविद्यालय अलवर के असिस्टेंट प्रॉफेसर डॉ भरत मीणा व डॉ महेश गोठवाल तथा विशिष्ट वक्ता के तौर चिमरावली स्कूल के प्राचार्य धर्मपाल मीणा, राजकीय महाविद्यालय राजगढ़ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ हरि सिंह मीणा, अध्यापक राजेश सैनी, हरिकिशन मीणा ने विचार व्यक्त किए। धन्यवाद भाषण विचार गोष्टी के संयोजक मोहर सिंह मीणा ने दिया, जबकि मंच संचालन हरिकिशन मीणा व कपिल शर्मा ने किया। इस अवसर पर डॉ भरत मीणा ने कहा कि सावित्री बाई फुले और जयपाल सिंह मुंडा ने अपने समय में समाज की परंपरागत जड़ता में हलचल पैदा करके नई दिशा दी। उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज की मुख्यधारा से कटे हुए आदिवासी मुंडा समाज में पैदा हुए। इसी दौरान वे प्रतिष्ठित भारतीय सिविल सेवा में भी चयनित होने वाले पहले आदिवासी थे।

वहीं डॉ महेश गोठवाल ने सावित्री बाई फुले के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने 19वीं शाताब्दी में उस समय महिलाओं की शिक्षा के पक्ष और धार्मिक पाखंडों, अंधविश्वासों व छुआछूत के खिलाफ़ अलख जगाई जब हमारा समाज रूढ़िवादिता और जड़ता का शिकार था। उन्होंने महिला शिक्षा के लिए भारत में पहला स्कूल खोला और उसकी पहली शिक्षिका भी बनी। उन्होंने सती प्रथा का विरोध किया और विधवाओं के उत्थान के लिए अनाथ आश्रम खोले, जहां उनके नवजात बच्चों की भी देखभाल की जाती थी।

उनके इन कामों का उस समय के समाज में जबरदस्त विरोध हुआ। अध्यापक राजेश सैनी ने कहां की लड़कियों और महिलाओं को सावित्रीबाई फुले से प्रेरणा लेकर अपने परिवार का नाम रोशन कर आगे बढ़ना चाहिए जिससे महिलाओं में जागृति पैदा हो सके। इस अवसर पर पूर्व पंचायत समिति सदस्य रामस्वरूप मीणा पाटन, विजय मीणा ठेकड़ीन, श्रीराम,लक्ष्मी नारायण सैनी, सीताराम सैनी, छोटेलाल सैनी, रतन लाल सैनी, राकेश सैनी,श्रीनारायण ठेकेदार, रामस्वरूप, अमीन मीना, रोहिताश, विनोद शर्मा, शुभम शर्मा,भीमसिंह, रेवड़राम, सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।