कुचामन सिटी|Deepika Jangir: पतंगों का पर्व मकर सक्रांति नजदीक है। महामारी की मंद पड़ती रफ़्तार और कोरोना वैक्सीनेशन की सुगबुगाहठ के बीच एक बड़ा पर्व आ रहा है। चारों और खुशियों का माहौल है और इसी के साथ पतंगबाजी परवान चढ़ने लगी है। शहर में जगह-जगह पतंग-डोर के बाजार सज चुके है और बिक्री का ग्राफ बढ़ने लगा है। शहर के ही कलालो की गल्ली स्थित मनोज पतंग सेंटर से मनोज अग्रवाल और विष्णु अग्रवाल ने बताया कि पतंगों के साथ-साथ बरेली रामपुर की पतंगों और डोर से दूकाने सज चुकी है। सुबह से शाम तक खरीदारों की रौनक बनी रहती है। बच्चे कार्टून कैरेक्टर्स वाली पन्नी की पतंगों को तरजीह दे रहे है। पन्नी की चमकीली पतंगे भी ग्राहकों को आकर्षित कर रही है। कटआउट पतंगे भी काफी बच्चो के लिए लोकप्रिय हो रही है। वही मैदानी पेंच लड़ाने वाले बरेली की पतंगे व मांझा मांग रहे है।

चायनीज मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित

मांझे के नाम पर तीन या छः गट्टे की चरखी ज्यादा बिक रही है। चाइनीज मांझा पूरी तरह निषेध है। दुकानों पर सिर्फ स्थानीय कारीगरों के साथ-साथ बरेली के कारीगरों का ही मांझा बेचा जा रहा है। यह सरकार की सराहनीय पहल है।