जयपुर|Deepika Jangir गुरुनानक जयंती के पर्व के शुभ मौके पर पीएम मोदी सरकार आखिर देश के किसानों के सामने झुक गयी. उन्होंने पिछले करीब एक साल से किसान आंदोलन की वजह बने तीनों नए कृषि कानून (Agriculture Laws) केंद्र सरकार ने वापस ले लिए हैं. शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधन में यह बड़ा ऐलान किया. जिसमें मोदी ने कहा कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को नेक नीयत के साथ लाई थी, लेकिन यह बात हम किसानों को समझा नहीं पाए.सिंघु और टीकरी के साथ दिल्ली के बॉर्डर्स पर किसान तीनों कृषि कानूनों(Agriculture Laws) के खिलाफ बीते 14 महीने से आंदोलन कर रहे थे. अब सरकार के फैसले के बाद किसान संयुक्त मोर्चा के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि हम तुरंत आंदोलन वापस नहीं लेंगे, बल्कि इन्हें संसद में वापस लेने का इंतजार करेंगे.

तीनों नए कृषि कानूनों को 17 सितंबर, 2020 को लोकसभा ने मंजूर किया था. राष्ट्रपति ने तीनों कानूनों के प्रस्ताव पर 27 सिंतबर को दस्तखत (Signature) किए थे. इसके बाद से ही किसान संगठनों ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया था.इस कानून में एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का प्रावधान है, जहां किसानों और कारोबारियों को मंडी के बाहर फसल बेचने की आजादी होगी. कानून में राज्य के अंदर और दो राज्यों के बीच कारोबार को बढ़ावा देने की बात कही गई है. साथ ही मार्केटिंग और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम करने की बात भी इस कानून में है.

इस कानून में कृषि करारों (Agriculture Agreement) पर नेशनल फ्रेमवर्क का प्रावधान किया गया है. ये कृषि उत्पादों की बिक्री, फार्म सेवाओं, कृषि बिजनेस फर्म, प्रॉसेसर्स, थोक और खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ किसानों को जोड़ता है. इसके साथ किसानों को क्वालिटी वाले बीज की आपूर्ति करना, फसल स्वास्थ्य की निगरानी, कर्ज की सुविधा और फसल बीमा की सुविधा देने की बात इस कानून में है.