बसपा प्रमुख मायावती ने उठाई श्रमिकों के लिए आवाज, कहा मजदूरों का शोषण बर्दाश्त नहीं होगा…

0
114
mayawati

मरुधर बुलेटिन न्यूज़ डेस्क। देश में फैले कोरोना संक्रमण के कारण सरकार ने लॉक डाउन लागू किया हुआ है। लॉक डाउन का तीसरा चरण 4 मई से शुरू हुआ है। तीसरे फेज में सरकार ने कई रियायत दी है 4 मई से उद्योगों में भी काम शुरू कर दिया गया है। हालांकि, सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए मजदूरों व श्रमिकों से 12 – 12 घंटे की शिफ्ट में काम करवाया जा रहा है। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने 12-12 घंटे श्रमिकों से काम करवाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। मायावती का कहना है कि मजदूरों से इस तरह काम करवाना उनका शोषण है। माया ने अपने ऑफिशियल टि्वटर हैंडल से 4 ट्वीट किए हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि मजदूरों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मायावती ने पहला ट्वीट करते हुए लिखा- कोरोना प्रकोप में मजदूरों/श्रमिकों का सबसे ज्यादा बुरा हाल है, फिर भी उनसे 8 के बजाए 12 घण्टे काम लेने की शोषणकारी व्यवस्था पुनः देश में लागू करना अति-दुःखद व दुर्भाग्यपूर्ण। श्रम कानून में बदलाव देश की रीढ़ श्रमिकों के व्यापक हित में होना चाहिये ना कि कभी भी उनके अहित में।

मायावती ने दूसरा ट्वीट करते हुए लिखा- जबकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने श्रमिकों के लिए प्रतिदिन 12 नहीं बल्कि 8 घण्टे श्रम व उससे ज्यादा काम लेने पर ओवरटाइम देने की युगपरिवर्तनकारी काम तब किया था जब देश में श्रमिकों/मजदूरों का शोषण चरम पर था। इसे बदलकर देश को उसी शोषणकारी युग में ढकेलना क्या उचित?

देश में वर्तमान हालात के मद्देनजर श्रम कानून में ऐसा संशोधन करना चाहिये ताकि खासकर जिन फेक्ट्री/प्राइवेट संस्थानों में श्रमिक कार्य करते हैं वहीं उनके रूकने आदि की व्यवस्था हो। किसी भी स्थिति में वे भूखे ना मरे और ना ही उन्हें पलायन की मजबूरी हो ऐसी कानूनी व्यवस्था होनी चाहिये। 

मायावती ने अपने आखिरी ट्वीट में कहा- वैसे तो अभी काम का पता नहीं है परन्तु सरकारें बेरोजगारी व भूख से तड़प रहे करोड़ों श्रमिकों/मजदूरों के विरुद्ध शोषणकारी डिकटेट लगातार जारी करने पर तत्पर हैं, यह अति-दुखद व सर्वथा अनुचित जबकि इस कोरोना के संकट में इन्हें ही सबसे ज्यादा सरकारी मदद व सहानुभूति की जरूरत है।