डेस्क न्यूज़: केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क कम करने के बाद करों को कम करने की बढ़ती मांगों के बीच, राजस्थान में अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार ने मंगलवार आधी रात को पेट्रोल और डीजल के वैट में 4 रुपये प्रति लीटर और 5 रुपये प्रति लीटर सस्ता कर कटौती की घोषणा की। इससे राज्य को सालाना 3,500 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर दी जानकारी

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट किया। कैबिनेट की बैठक में सर्वसम्मति से पेट्रोल/डीजल पर वैट की दर कम करने का निर्णय लिया गया। रात 12 बजे से पेट्रोल के लिए 4 रुपये प्रति लीटर और डीजल के लिए 5 रुपये प्रति लीटर की दरों में कमी की जाएगी।’

राजस्थान सहित कुछ कांग्रेस शासित राज्यों ने वैट में कटौती करने से किया था इन्कार

आपको बता दे की कि 3 नवंबर को केंद्र सरकार ने देश में ईंधन दरों को कम करने के लिए पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 5 रुपये और डीजल पर 10 रुपये की कटौती की थी। वहीं, उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद, पंजाब और ओडिशा सहित कई भाजपा शासित राज्यों ने कीमतों में और कमी लाने के लिए ईंधन पर वैट कम किया था। लेकिन राजस्थान सहित कुछ कांग्रेस शासित राज्यों ने वैट में कटौती नहीं की और केंद्रीय उत्पाद शुल्क में और कमी की मांग की थी।

मोदी सरकार पर जमकर बरसे प्रताप सिंह खाचरियावास

मंगलवार रात को राजस्थान कैबिनेट की बैठक के बाद परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि जनता को राहत देने के लिए कांग्रेस सरकार द्वारा यह फैसला लिया गया है। खाचरियावास ने महंगे पेट्रोल-डीजल को लेकर मोदी सरकार पर जमक निशाना साधा और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों को कमजोर करने का काम कर रही है। खाचरियावास ने आगे कहा कि पेट्रोल और डीजल के लिए एक देश एक दर की नीति होनी चाहिए और परिवहन लागत केंद्र द्वारा वहन की जानी चाहिए।

मोदी सरकार ने छह साल में उत्पाद शुल्क में 40-45 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है: प्रताप सिंह खाचरियावास

प्रताप सिंह खाचरियावास ने मोदी सरकार को निशाना बनाते हुए आगे कहा कि 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले जब केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 111 डॉलर प्रति बैरल थी और देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत 61 रुपये प्रति लीटर और 59 रुपये प्रति लीटर थी। लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल पर है तब देश में ईंधन महंगा है क्योंकि मोदी सरकार ने छह साल में उत्पाद शुल्क में 40-45 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है।

देश में पेट्रोल और डीजल के लिए एक राष्ट्र एक मूल्य नीति होनी चाहिए

ईंधन के परिवहन के बारे में, खाचरियावास ने संवाददाताओं से कहा की “केंद्र ने छह साल में उत्पाद शुल्क में 40-45 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की और लोगों को खुश करने के लिए 10-15 रुपये कम किए। देश में पेट्रोल और डीजल के लिए एक राष्ट्र एक मूल्य नीति होनी चाहिए और केंद्र सरकार को लागत वहन करनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि लोगों को मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली पूर्व यूपीए सरकार और वर्तमान मोदी सरकार की नीतियों का विश्लेषण करना चाहिए।

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