शराब की दुकानें बंद करने की याचिका पर आदेश देने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इंकार, कहा- राज्य सरकारें शराब की होम डिलीवरी पर विचार करें…

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मरुधर बुलेटिन न्यूज़ डेस्क। कोरोना संकट के चलते देश में लॉक डाउन लागू है। लॉक डाउन के तीसरे चरण में सरकार ने कुछ रियायते दी हैं। लॉक डाउन की तीसरी अवधि शुरू होने के साथ शराब की दुकानें भी खोल दी गई है। लेकिन शराब की दुकानों के बाहर आए दिन लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है। जिससे सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने में खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में शराब की दुकानों को बंद करने के लिए याचिका दायर की गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस याचिका पर आदेश देने से मना कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने शराब की बिक्री पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। साथ ही कहा है कि शीर्ष अदालत इस याचिका पर कोई भी आदेश नहीं देगी। राज्य सरकारों को सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करते हुए शराब की बिक्री की ऑनलाइन सेल या फिर होम डिलीवरी के बारे में सोचना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने इस संबंध में दायर की गई याचिका को भी खारिज कर दिया है। 

बता दें कि शीर्ष अदालत में दायर की गई याचिका में कहा गया था कि देश में लागू लॉक डाउन के चलते शराब की दुकानों और ठेकों के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना बेहद मुश्किल हो रहा है। महामारी के बीच शराब की बिक्री से आम लोगों के जीवन पर बेहद असर पड़ रहा है इसलिए शराब की बिक्री पर रोक लगाने चाहिए। इस पूरे मामले में जस्टिस अशोक भूषण जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की। इसी बीच मदुरै में CPI-M कार्यकर्ताओं सहित प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच हाथापाई हो गई।  ये सभी लोग तमिलनाडु सरकार के राज्य में शराब की दुकानें और ठेके खोलने के फैसले का विरोध कर रहे थे।

बता दें कि लॉक डाउन के 40 दिन बाद जब शराब की दुकान और ठेके को ले गए तो शराब खरीदने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। ठेकों के बाहर किलोमीटर तक की लंबी कतारें लग गई लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का भी जमकर उल्लंघन किया। जिसके बाद छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने शराब की होम डिलीवरी करने का फैसला लिया है। वहीं दिल्ली में ई टोकन के जरिए शराब बेची जा रही है।