पुलवामा के शहीदों की शहादत को प्रणाम…

0
127

मरुधर बुलेटिन न्यूज़ डेस्क।

“क्या खूब मोहब्बत हुई होगी उन्हे अपने मुल्क से,
जो मोहब्बत के दिन मोहब्बत के लिए जान तक दे बैठे”।।
जी हां, आज वही काला दिन है जिस दिन पुलवामा में हुए आतंकी हमले में देश के 40 जवान शहीद हो गए थे। 14 फरवरी के दिन देश के वीरों की शहादत पर पूरे देश की आंखे नम थी। आज पूरा एक साल हो गया है इस दुखद घटना को, लेकिन आज भी देशवासियों के दिलों में पुलवामा हमले का दर्द मौजूद है। उस नृशंस हमले को याद कर आज भी लोग सिहर जाते है। शहीदों के घरवालों की रोती-बिलखती आवाजें आज भी कानों में सुनाई पड़ती है। वह दर्दनाक मंजर आज भी आखों के सामने नजर आता है। पुलवामा अटैक को लेकर आज भी देशवासियों के दिलों में उतना ही गुस्सा , उतना ही आक्रोश है। आज पूरे देश में पुलवामा के शहीदों की बरसी मनाई जा रही है और पूरा देश उन वीरों को श्रद्धांजलि दे रहा है।

देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि वे सबसे अलग थे जिन्होने हमारे देश की रक्षा और सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। भारत उन वीरों की शहादत को कभी नही भूलेगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पुलवामा के जवानों को याद करते हुए कहा कि देश उनके बलिदान को कभी नही भूलेगा। भारत हमेशा हमारे बहादुरों और उनके परिवारों का आभारी रहेगा जिन्होंने हमारी मातृभूमि की संप्रभुता और अखंडता के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।’ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी देश के वीर शहीदों को नमन किया।
पुलवामा हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए आज पूरा देश एकजुट है। पुलावामा हमले के बाद जवानों की शहादत का बदला लेने के लिए भारत ने एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया जिसमें आतंकियों के बैस कैंप को पूरी तरह से तबाह कर दिया गया । लेकिन कहीं न कहीं पुलवामा हमलें में बचे जवानों को अपने साथियों का बदला अपने हाथों से न ले पाने का मलाल आज भी है। इस नृशंस हमले को पूरा एक साल हो गया है लेकिन उन विरांगनाओं का दर्द आज भी कम नही हुआ है। इस हमले में शहीद हुए जवानों के परिवार के जख्म आज भी हरे है। वीरांगनाओं का कहना है कि इस हमले में उनका सब कुछ चला गया और सरकार ने सुध भी नही ली। शहीदों के परिवार को आर्थिक सहायता तो मिली लेकिन कुछ वायदे ऐसे भी है जो अभी तक पूरे नही किए गए है। जैसे शहीद के परिवार में से किसी एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी नही मिली इसके अलावा न ही शहीद स्मारक बने।