रेलवे ने लिया बड़ा फैसला, श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को चलाने के लिए राज्य सरकारों की अनुमति की जरूरत नहीं…

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मरुधर बुलेटिन न्यूज़ डेस्क। देश में कोरोना महामारी और लॉक डाउन के चलते अलग-अलग हिस्सों में फंसे प्रवासियों को श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के द्वारा उनके घर पहुंचाया जा रहा है। मंगलवार को रेलवे ने जानकारी देते हुए बताया कि अब श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को चलाने के लिए संबंधित राज्यों की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। इससे पहले गृह मंत्रालय ने प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्यों में पहुंचाने के लिए इन ट्रेनों को चलाने के लिए रेलवे के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम (एसओपी) को जारी किया। रेलवे के प्रवक्ता राजेश बाजपेई के अनुसार नई एसओपी अनुसार श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को चलाने के लिए गृह राज्यों से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।बहरहाल, रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट के जरिए जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में रेलवे द्वारा 20 लाख से अधिक कामगारों को 1,565 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन कर उनके घर भेजा जा चुका है। अकेले उत्तर प्रदेश 837, बिहार 428 और मध्यप्रदेश 100 से अधिक ट्रेनों की अनुमति दे चुके है।

बता दें कि इससे पहले श्रमिक स्पेशल ट्रेने राज्य सरकारों की मांग पर चल रही थी। इस दौरान केंद्र के द्वारा जारी की गई गाइडलाइन का पालन किया जा रहा था। कोच में यात्रियों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बैठाया जा रहा था । साथ ही स्टेशनों पर उनकी थर्मल स्क्रीनिंग भी हो रही थी। गृह जिले में पहुंचने के बाद उन्हें 14 दिन के अनिवार्य क्वॉरेंटाइन में रखा जा रहा था। क्वॉरेंटाइन की अवधि पूरी करने के बाद ही उन्हें घर जाने की अनुमति दी जा रही थी। वहीं, लोगों को भेजने और बुलाने वाली राज्य सरकारों के विशेष आग्रह पर ही ट्रेनें चल रही थी और यह ट्रेन बीच में कहीं पर भी नहीं रुक रही थी। वहीं, जिन लोगों में संक्रमण के लक्षण दिखाई दिए उन्हें जाने की अनुमति नहीं मिली।