Jaipur: रविवार को जयपुर में कांग्रेस की मंहगाई रैली का आयोजन हुआ। इस रैली का मुख्य मुद्दा महंगाई था लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भाषण में फोकस हिंदू और हिंदुत्व पर रहा। राहुल गांधी ने कहा कि दो शब्दों का एक मतलब नहीं हो सकता। हर शब्द का अलग मतलब होता है। देश की राजनीति में आज दो शब्दों के मतलब अलग हैं। एक शब्द हिंदू दूसरा शब्द हिंदुत्ववादी। ये एक चीज नहीं है, ये दो अलग शब्द हैं और इनका मतलब बिल्कुल अलग है। मैं हिदू हूं, लेकिन हिंदुत्ववादी नहीं हूं। महात्मा गांधी हिंदू थे और नाथूराम गोडसे हिंदुत्ववादी थे। रैली में प्रियंका गांधी ने भी केंद्र सरकार और भाजपा की रीति-नीति पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जनता के लिए काम नहीं कर रही है। यह सिर्फ गिने-चुने उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है। केंद्र की सरकार झूठ, लालच और लूट वाली सरकार है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो मुख्यमंत्री के पत्र का जवाब नहीं देते हैं। यह सरकार घमंड से चल रही है। लेकिन इस रैली में एक सवाल खडा हुआ पायलट के भाषण की टाइमिंग पर। महंगाई हटाओ महारैली में पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का भाषण वारिष्ठ नेताओं के आने से पहले ही करवा दिया गया। ऐसे में पायलट के भाषण की टाइमिंग पर भी सवाल खड़े होने लगे है। इसके साथ ही सीएम गहलोत ने अपने भाषण में मंच पर उपस्थित सभी नेताओं के नाम लिए लेकिन पूर्व उपमुख्यमंत्री को वे भूल गए। इसी तरह जब पायलट समर्थकों ने सचिन पायलट के समर्थन में नारे लगाने शुरू किए तो उन्हें चुप करवा दिया गया। हालांकि फिर भी पायलट ने रैली को बड़ा आयोजन बताया और कहा कि इस रैली की गूंज दिल्ली तक जाएगी। उन्होंने कहा कि महंगाई हटाओ महारैली के जरिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। महंगाई हटाओ महारैली में सचिन पायलट ने कहा कि महंगाई हटाने का जो संकल्प की गूंज दिल्ली में बैठी सरकार को सुनाई देगी। यह मुद्दा केवल कांग्रेस पार्टी का नहीं है, यह पूरे देश का मसला है। आज की रैली से देश में होने वाली आगे की राजनीति को दिशा मिलेगी। वो लोग जो दिल्ली में घमंड और अहंकार से राज करते हैं, वो लोग जिनकी नीति और नियत दोनों खराब है, वो लोग जिन्होंने इसे देश को अंधकार में धकेलने का काम किया है, वो लोग जिनकी नाक के नीचे देश की सीमाओं पर आक्रमण हो रहे हैं। वो लोग सत्ता के नशे में हैं। उन लोगों को जयपुर से संदेश जाना चाहिए। लेकिन इस तरह से पायलट को नजरअंदाज किए जाने से सियासी हल्कों में चर्चाएं फिर तेज हो गई है। प्रदेश की राजनीति में सब ठीक होने के, राजस्थान कांग्रेस दो धड़ो में न बंटे होने के कितने ही दावे क्यों न किए जाएं… लेकिन एक बार फिर पायलट को दरकिनार कर ये दावे खुद मुख्यमंत्री ने खोखले साबित कर दिए है।