Jaipur: कोरोना महामारी के नए वैरिएंट ओमिक्रोन से पूरे देश में दहशत का माहौल बना हुआ है। मरूधरा में एक बार फिर कोरोना ने दस्तक दे दी है। राजधानी जयपुर सहित कई शहरों में कोरोना पॉजीटिव लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है तो वहीं दूसरी और सियासत के लिए लालायित राजनीतिक पार्टियां कोरोना से बेपरवाह है और लाखों लोगों की भीड़ इकट्ठी करने के प्रयास में जुटी हुई है। भगवा पार्टी के चाणक्य की गुलाबी नगर में होने वाली रोड शो को लेकर कार्यकर्त्ता जुट गए है तो वहीं दूसरी और सबसे पुरानी पार्टी को दिल्ली में महंगाई रैली की इजाजत नहीं मिलने का तोड़ निकाल लिया और गुलाबी नगर में 12 दिसंबर को रैली निर्धारित कर दी। लेकिन जिनके ऊपर कोरोना को रोकने की जिम्मेदारी है यदि वहीं इसको फैलाने की हरकत करें तो फिर लोगों से उम्मीद करना बेमानी ही होगा। कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान कितने लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा था और कितने लोगों को बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से जूझना पड़ा था इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। सरकार ने तब लॉकडाउन लगाया तो कहीं नेताओं ने आरोप लगाए कि लॉकडाउन समय पर नहीं लगाया गया लेकिन अब तो दोनों ही पार्टियां अपने लब्बोलुहाब में डूब गई है। दिल्ली में तब्लीगी जमात की रैली को तब काफी सुर्खियां मिली थी और उसे कोरोना फैलाने का दोषी माना गया था। पर अब किसे दोषी ठहराएंगे भगवा दल को या फिर सबसे पुरानी हाथ वाली पार्टी को? लेकिन सवाल यह है कि ठहराए कौन? अपने वोट बैंक या स्वार्थ सिद्धि के लिए तो सियासी दल खूब दांव पेंच कर बैठते और एक दूसरे पर दोषारोपण कर देते मगर यहां कौन करें? अब इस मामले में न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना चाहिए और कोरोना की संभावित तीसरी लहर से मरूधरा सहित पूरे देश को बचाना चाहिए अन्यथा भीड़ में जुटे लोग संक्रमण लेकर जाएंगे और देश को गंभीर विपदा में ला खड़ा करेंगे।