Marudhar Desk: बुधवार का दिन देश के लिए सामान्य दिनों की तरह ही था, लेकिन 1 बजते- बजते देशवासियों के सामने ऐसी खबर आई कि सबकी आंखे, टीवी और मोबाईल स्क्रीन पर गड़ गईं। ये ऐसी खबर थी जिसने देशवासियों को सकते में डाल दिया, इस खबर पर भरोसा कर पाना बेहद मुश्किल था। भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और उनकी टीम का हेलिकॉप्टर दक्षिण भारत के कुन्नूर में क्रैश हो गया था। इसमें उनकी पत्नी मधुलिका रावत भी सवार थी। हालांकि, भारत सरकार या भारतीय सेना की तरफ से कोई अधिकारिक जानकारी नहीं दी गई थी। उस वक्त तक सभी देशवासियों की बस एक ही दुआ थी कि सब ठीक हो। हादसे की तस्वीरें सामने आने लगी, भारतीय वायु सेना ने ट्वीट के जरिए जानकारी दी कि, ‘भारतीय वायुसेना का हेलिकॉप्टर MI- 17 कन्नूर के पास हादसे का शिकार हो गया है। जनरल बिपिन रावत इसमें सवार हैं। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच घोषित कर दी गई है।’ तस्वीरें रुह कंपा देने वाली थी, हादसा भीषण था, चारों तरफ आग ही आग थी, सब जलकर राख हो चुका था लेकिन एक आस, एक धुंधली उम्मीद अभी भी सभी के दिल में थी कि सब ठीक हो, हालांकि, तस्वीरें साफ बयां कर रही थी कि हादसा कितना भीषण था, लेकिन किसी का भी दिल ये मानने को तैयार नही था और बस सबके लबों पर एक ही दुआ थी कि सब ठीक हो, बस सब ठीक हो……… लेकिन शाम के 6 बजते बजते मनहूस खबर सामने और बुधवार का दिन पूरे देश के लिए काले दिन में तब्दील हो गया। इस हादसे ने देश के पहले सीडीएस और एक बेहतरीन सैनिक को खो दिया।

crash


सीडीएस जनरल बिपिन रावत अब दुनिया को अलविदा कह चुके है… हर किसी के लिए इस मनहूस खबर पर यकीन करना नामुमकिन सा था। उनके साथ उनकी पत्नी और अन्य 11 भी इस हादसे का शिकार हो गए। हादसे में जीवित बचे इकलौते शख्स हैं ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह। उनका इलाज चल रहा है। हालांकि उनकी हालत भी गंभीर बताई जा रही है। जिस वक्त ये हादसा हुआ उस वक्त बिपिन रावत समेत सभी 14 लोग MI-17 हेलिकॉप्टर में सावर थे। ये हेलिकॉप्टर वायुसेना का सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित हेलिकॉप्टर माना जाता है।
इस सबसे सुरक्षित हेलिकॉप्टर को उड़ाने वाला भी सबसे भरोसेमंद था। तो ऐसे में मानवीय भूल होने की गुंजाइश भी बेहद कम है। सीडीएस बिपिन रावत के हेलिकॉप्टर को बेहद अनुभवी पायलट ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह उड़ा रहे थे। उनकी दक्षता और अनुभव शक से बिल्कुल परे है। ऐसे में मानवीय भूल की संभावना बेहद कम है।

varun singh captain


जनरल रावत को नीलगिरी पहाड़ों में स्थित डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन पहुंचना था और यहां फैकल्टी और स्टूडेंट ऑफिसर्स को संबोधित करना था। वो मंजिल से सिर्फ दस किलोमीटर दूर थे। इससे पहले भी साल 2015 में बिपिन रावत हेलिकॉप्टर हादसे का शिकार हुए थे। लेकिन तब उन्होनें मौत को चकमा दे दिया था। यह घटना 3 फरवरी 2015 की है। तब बिपिन रावत लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर थे। जब यह हादसा हुआ था तब बिपिन रावत सेना की नागालैंड के दिमापुर स्थित 3-कोर के हेडक्वार्टर के प्रमुख थे। दिमापुर से रावत अपने चीता हेलिकॉप्टर में सवार होकर निकले, लेकिन कुछ ऊंचाई पर उनके विमान का नियंत्रण खो गया और हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। हालांकि, उस वक्त उन्होंने मौत को मात दे दी थी। लेकिन इस बार भाग्य ने सात नही दिया और मां भारती ने अपना सबसे बहादुर और वीर लाल खो दिया।
जीवन – परिचय
जनरल बिपिन रावत का जन्म 16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में एक क्षत्र‍िय परिवार में हुआ। रावत ने देहरादून में कैंबरीन हॉल स्कूल, शिमला में सेंट एडवर्ड स्कूल और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से शिक्षा ली , जहां उन्हें ‘सोर्ड ऑफ़ ऑनर’ दिया गया। वह फोर्ट लीवनवर्थ, यूएसए में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज , वेलिंगटन और हायर कमांड कोर्स के स्नातक रहे। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से डिफेंस स्टडीज में एमफिल , प्रबंधन में डिप्लोमा और कम्प्यूटर स्टडीज में भी डिप्लोमा किया। 2011 में, उन्हें सैन्य-मीडिया सामरिक अध्ययनों पर अनुसंधान के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा डॉक्टरेट ऑफ़ फिलॉसफी से सम्मानित किया गया। 16 दिसंबर 1978 को रावत 11 गोरखा राइफल्स की 5वीं बटालियन में तैनात हुए। कर्नल के रूप में उन्होंने एलएसी के पास पूर्वी सेक्टर में उन्होंने 5वीं बटालियन की कमान संभाली। बाद में रावत प्रमोट कर ब्रिगेडियर बनाए गए। उन्होंने सोपोर में राष्ट्रीय राइफल्स के 5 सेक्टर की कमान संभाली। इसके बाद उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत कांगो में एक मल्टीनेशनल ब्रिगेड की कमान संभाली।
जनरल बिपिन रावत को सेना में अपनी सेवाओं के लिए कई बहादुरी पुरस्कारों से नवाजा गया। इनमें परम विशिष्ठ सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ठ सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल, सेना मेडल, सामान्य सेवा मेडल, स्पेशल सर्विस मेडल, ऑपरेशन पराक्रम मेडल, सैन्य सेवा मेडल समेत कई सम्मान प्राप्त हुए।जनरल बिपिन रावत ऐसी शख्सियत थी जो स्पष्टवादी और निडर माने जाने वाले सीडीएस जनरल बिपिन रावत दुश्मन की आंख में आंख डालकर बात करने का मादा रखते थे। भारत मां के इस लाल से चीन हो या पाकिस्तान सभी थरथराते थे। इनकी उपलब्धिया इतनी है कि उन्हें गिनने में भी वक्त लगेगा। जनरल बिपिन रावत ने जून 2017 में एक बयान दिया था उस समय वो आर्मी चीफ थे। रावत ने कहा था कि हमारी सेना ढाई मोर्चों पर एक साथ जंग लड़ने के लिए तैयार है। बिपिन रावत के इस बयान पर चीन और पाकिस्तान दोनों भड़क गए थे। क्योंकि इस बयान के मायने साफ थे। भारतीय सेना चीन, पाकिस्तान और आतंकवाद से एक साथ निपटने में सक्षम है। स्पष्टवादी और निडर माने जाने वाले 63 साल के जनरल बिपिन रावत जब 2016 से 2019 के बीच सेना प्रमुख थे तब उन्होंने सीमा पार आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद से निपटने के लिए खुली छूट की नीति का पुरजोर समर्थन किया था। उरी हमले के बाद सितंबर 2016 में जब भारतीय सेना ने सीमा पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक की, तब बिपिन रावत सेना के उप सेना प्रमुख थे। बताया जाता है कि इस में बिपिन रावत की भी अहम भूमिका थी। इसके बाद फरवरी 2019 में पुलवामा हमला हुआ तो वायुसेना ने एलओसी पार कर बालाकोट में एयर स्ट्राइक की। उस वक्त बिपिन रावत सेना प्रमुख थे। 1 जनवरी 2016 को जनरल बिपिन रावत दक्षिणी कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ नियुक्त हुए। दिसंबर 2016 में वो सेना प्रमुख बने। 2019 में बिपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस बनाए गए।