अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने के बाद तालिबान के अत्याचारों की कहानी रूकने का नाम नहीं ले रही है। तालिबान कितना बर्बर है, इसे भारत में रह रहे अफगान महिलाओ ने बयां किया है। राजधानी दिल्ली के लाजपत नगर में रह रही अफ़गानी महिला हथिरा हाशमी नौ महीने पहले भारत आई थी। तालिबान की क्रूरता की शिकार हाशमी की दोनो आँखें तालिबानियों ने निकाल ली और उनपर कई हमले सिर्फ़ इसलिए किए क्यूँकि वो पुलिस में काम करती थी और महिलाओं के हित के लिए बोलती थी।
तालिबानियो की क्रूरता की कहानी हथिरा की मुँह ज़ुबानी सुनिए जो दो महीने की प्रेग्नेंट थी जब उन पर तालिबानी आतंकियों ने हमला किया था। जब वह भारत आयी तो यहाँ उन्होंने बेटे को जन्म दिया और बाक़ी पाँच बच्चे अभी भी अफगानिस्तान में हैं। उन्हें रोज़ तालिबानियो की तरफ़ से धमकी मिल रही हैं की अपनी माँ को बोलो वापिस आने के लिए , हथिरा अपने परिवार वालों के लिए बहुत डरी हुई हैं। हथिरा एकमात्र महिला नहीं हैं जो तालिबानियों का शिकार बनी, बल्कि कई और भी इसी तरह की महिलाएं तालिबानी आतंकियों का शिकार बन चुकी हैं।अफगानिस्तान की महिलाएं तालिबान के आतंक से त्रस्त आकर अब सड़कों पर निकल रही हैं। गुरुवार को काबुल में बड़ी संख्या में पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी तालिबान के खिलाफ नारे लगाए। काबुल हवाई अड्डे के समीप लोगों ने कारों में सवार होकर एवं पैदल मार्च निकाला एवं उनके हाथों में अफगान ध्वज के सम्मान में लंबे काले, लाल एवं हरे बैनर थे। यह बैनर अवज्ञा का प्रतीक बनता जा रहा है क्येांकि आतंकवादियों का अपना झंडा है। नांगरहार प्रांत में प्रदर्शन को लेकर एक वीडियो जारी किया गया है जिसमें नजर आ रहा है कि एक प्रदर्शनकारी को गोली लगी है।