बच्चों से न छिने उनका बचपन, इसलिए आज मनाया जा रहा है “बाल श्रम निषेध दिवस”…

0
41
child labour against day

मरुधर बुलेटिन न्यूज़ डेस्क। आज 12 जून को बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जा रहा है। इसकी शुरुआत साल 2002 में  “द इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन” के द्वारा की गई थी। इस पहल की शुरुआत 14 साल से कम उम्र के बच्चों को मेहनत मजदूरी के काम से निकाल कर पढ़ाई में लगाने के लिए की गई थी। बाल श्रम के चलते लाखों बच्चों से उनका  खिलखिलाता बचपन छिन जाता है और काम के बोझ तले उनके सपने दब कर रह जाते हैं। इन बच्चों को देश का आने वाला भविष्य कहा जाता है लेकिन पेट भरने के लिए इन्हें मजदूरी करनी पड़ती है। यह खेलने या स्कूल जाने के बजाए पेट भरने के लिए दो वक्त की रोटी कमाने में जुट जाते हैं। इसलिए बाल श्रम को रोकने के लिए और इसके खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 12 जून को बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। 

बता दें कि दुनियाभर के कारखानों और फैक्ट्रियों में यह छोटे-छोटे बच्चे रोटी कमाने के लिए दिन रात मेहनत मजदूरी करते हैं। बच्चों को जबरन श्रम कार्यों में धकेल दिया जाता है। जिससे इनके मानसिक और शारीरिक विकास पर भी बेहद प्रभाव पड़ता है। 5 साल की उम्र से ही यह बच्चे काम करने में जुट जाते हैं जिससे इनकी सेहत और विकास दोनों पर ही हानिकारक प्रभाव पड़ता है। 5 से 17 वर्ष की आयु के बच्चे सामान्य बचपन से वंचित रह जाते हैं। इस साल बाल श्रम निषेध दिवस की थीम बच्चों को “कोविड-19 महामारी से बचाना” है। दुनिया में फैली कोरोना महामारी की वजह से लोगों की जिंदगी बहुत अधिक प्रभावित हुई है ऐसे में आशंका है कि छोटे बच्चों को बाल श्रम की ओर धकेला जा सकता है। इसी वजह से बाल श्रम निषेध दिवस की थीम “बच्चों को कोविड-19 महामारी” से बचाना है।