साल 2020 नहीं आसान, बस इतना समझ लीजिए….

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The problem...2020

मरुधर बुलेटिन न्यूज़ डेस्क। अश्वनी सिरोही के अनुसार- साल 2020, ऐसा साल जो मुसीबतों से भरा है। हर वर्ग का व्यक्ति इस वर्ष मुसीबतों का सामना करता दिखाई दे रहा है। कोरोना महामारी, अफान चक्रवात, निसर्ग चक्रवात, भूकंप और ना जाने कितनी आपदाएं…यह साल वाकई में बेहद मुश्किल है लेकिन साल 2020 सबसे ज्यादा मुश्किल रहा है हिंदी सिनेमा के लिए…इस साल के अभी 6 महीने भी पूरे नहीं हो पाए हैं लेकिन हिंदी सिनेमा पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है…इस साल बॉलीवुड ने अपने कई चमकते सितारों को खो दिया है। सबसे पहले इरफान, ऋषि कपूर, फिर वाजिद खान और अब सुशांत सिंह राजपूत… 2 महीने से भी कम समय में बॉलीवुड के चार सितारे हमेशा के लिए आसमान में चले गए हैं। सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या से पूरा हिंदी सिनेमा सहम गया है। उनकी सुसाइड के पीछे का कारण डिप्रेशन बताया जा रहा है। सुशांत पिछले 6 महीने से डिप्रेशन से जूझ रहे थे उन्होंने इस बारे में किसी से ना बात की ना कुछ कहना जरूरी समझा या यूं कहें, “इससे ज्यादा बुरा क्या होगा…कि उसने अपना दर्द औरों को बताने से ज्यादा आंसा, मौत को गले लगाना समझा”…सुशांत के परिवार वाले, दोस्त उनके फैंस कोई भी इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहा है कि सुशांत अब इस दुनिया में नहीं रहे। खासकर इस बात पर तो बिल्कुल भी नहीं कि उन्होंने आत्महत्या की है। जिंदगी से लड़ना सिखाया उसने..पर खुद जिंदगी से जंग हार गया…सुशांत की आखिरी फिल्म छिछोरे में उन्होंने यही सीख दी थी कि चाहे कैसी भी परिस्थिति क्यों ना सामने आ जाए जिंदगी से हारो मत…आत्महत्या जैसा कदम बिल्कुल मत उठाओ…सुशांत बेहद सौम्य स्वभाव के थे। उनके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती थी। किसी को भी इस बात पर विश्वास नहीं हो पा रहा है कि उन्होंने इतना बड़ा कदम उठाया है। इस हादसे से इतना तो समझ में आ गया है कि कई बार अपनों से बात करना बेहद जरूरी है आपके दिल में क्या कुछ है आप किस चीज से जूझ रहे हैं उसे अपने दोस्तों अपने परिवार अपने चाहने वालों के साथ जरूर शेयर करें। क्योंकि डिप्रेशन का मतलब सोच में पड़े रहना, रोते रहना, दुखी रहना ही नहीं है। कई बार हंसते हुए चेहरे का गम पढ़ पाना भी बेहद मुश्किल हो जाता है…