लंबे समय से अटकलों के बीच चल रहे राजस्थान मंत्रिमंडल फेरबदल पर कांग्रेस हाईकमान ने मुहर लगा दी है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अजय माकन के जयपुर दौरे के मायने साफ है। खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत फेरबदल के साफ संकेत दे चुके है। माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान के द्वारा तय किए गए फेरबदल के फॉर्मूले के बाद गहलोत मंत्रिमंडल आधा बदल जाएगा। यहां तक कि 2023 में होने जा रहे चुनावी फायदे को ध्यान में रखने की सलाह दी गई है। गोविंद सिंह डोटासरा, रघु शर्मा और हरीश चौधरी के इस्तीफों के बाद अब मंत्रिमंडल में 12 पद खाली है। रविवार 21 तारीख को होने जा रहे मंत्रिमंडल फेरबदल के उम्मीदवारों की लंबी कतार है। 12 पदों की दौड में 4 गुना नेता मैदान में है। वहीं, मुख्यमंत्री पहले ही कह चुके है कि किसकी लॉटरी लगने वाली है, ये तो सिर्फ प्रभारी अजय माकन और आलाकमान ही जानते है। जहां एक तरफ सचिन पायलट अपने खेमे से 5 से 6 मंत्रियों को पद दिलाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा चुके है तो वहीं निर्दलीय नेता भी सीएम गहलोत पर उम्मीद टिकाए बैठें है। वहीं, बसपा नेताओं ने मुश्किल घड़ी में गहलोत सरकार का साथ दिया तो वे भी अब मुख्यमंत्री से ईनाम की अपेक्षा कर रहे है। हालांकि, बसपा से केवल राजेन्द्र गुढ़ा को ही मंत्रिमंडल में जगह मिलने के आसार नजर आ रहे है। वहीं अगर बात करें पायलट खेमे की तो हेमाराम चौधरी, बृजेन्द्र ओला, दीपेन्द्र शेखावत, रमेश मीणा और मुरारीलाल मीणा हैं। वहीं बसपा से राजेन्द्र गुढा, जबकि निर्दलीयों में महादेव खंडेला, संयम लोढ़ा का नाम चर्चा में है। वहीं माना जा रहा है कि बसपा के बाकि पांच विधायकों को संसदीय सचिव बनाकर या राजनीतिक नियुक्तियां देकर संतुष्ट किया जा सकता है। मास्टर भंवरलाल मेघवाल के निधन के बाद गहलोत सरकार में कोई दलित कैबिनेट मंत्री नहीं है। स्वर्गीय मास्टर मेघवाल की जगह मंजू मेघवाल का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। वहीं आदिवासी क्षेत्र से महेन्द्रजीत सिंह मालवीय का नाम कन्फर्म माना जा रहा है। वहीं, रामलाल जाट, जाहिदा खान और शंकुतला रावत के नाम की भी चर्चा जोरों पर है।वहीं, परफॉर्मेंस के आधार पर भी कुछ मंत्रियों के हटने की संभावना है। सियासी समीकरणों को बैलेंस करने के लिए भी कुछ मंत्रियों को हटाया जा सकता है।