सरदारशहर। प्रदेश भर में झोलाछाप डॉक्टरों के चलते ना जाने कितनी ही जाने चली जाती है। हालांकि समय – समय पर सरकारें उनके खिलाफ अभियान भी चाहती है और कार्रवाई भी करती है लेकिन फिर भी नियम कानूनों को धत्ता बताकर ये झोलाछाप डॉक्टरों बेखौफ होकर अपने दुकान में चलाते हैं और जनता की गाढ़ी कमाई को लूटते हैं । इससे चिकित्सा विभाग की लचर व्यवस्था कहें या कुछ और झोलाछापो के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती जिसके चलते झोलाछाप डॉक्टर बेखौफ होकर जनता को लूटने का और उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का काम करते हैं। ऐसा ही मामला है सरदारशहर का जहां एक झोलाछाप कथित डॉक्टर पिछले लंबे समय से आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच करने के लिए आती है तो अपने आप को यह डॉक्टर ना बता कर सहायक बताने लगता है। हालांकि 6 महीने पूर्व आई चिकित्सा विभाग की जांच टीम के सामने इसी झोलाछाप डॉक्टर ने अपने आप को डॉक्टर बताया था लेकिन 6 महीने बाद ही यह झोलाछाप डॉक्टर मुकर गया और और आज जब चिकित्सा विभाग की टीम ने इस क्लीनिक पर छापा मारा तो कथित डॉक्टर अपने आप को चिकित्सा विभाग की टीम के सामने डॉक्टर का सहायक बताने लगा।

कथित डॉक्टर 20 सालों से चला रहा है अपनी दुकान

सरदारशहर के कच्चा बस स्टेण्ड पर पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से झौलाछाप कथित स्वयभू डाॅ. रमेश शर्मा अवैध रूप से क्लिनिक चलाते है, जिसकी समय-समय पर शिकायत उच्च अधिकारियों को दस्वावेज सहित की जा रही है। मगर कभी किसी भी अधिकारी के कानों पर जूं तक नहीं रैगी। लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला कलेक्टर सांवरमल वर्मा ने साहस दिखाया और ड्रग इंस्पेक्टर मनोज गढवाल को कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

मनोज गढ़वाल अपनी टीम के साथ झौलाछाप डाॅक्टर के क्लिनिक पहुंचें। मौके पर क्लिनिक पर डाॅ. रमेश शर्मा, आयुर्वेद रत्न रजि नं. 18967 एवं मोबाईल नं. लिखा हुआ था। क्लिनिक के अंदर जाने पर झौला डाॅक्टर रमेश शर्मा भी अंदर पाया गया। अपने आप को 20 वर्षों से आयुर्वेद डाॅक्टर बताने वाला रमेश शर्मा ने आज अपने आप को डाॅक्टर होने से माना कर दिया। कहां कि मैं यहां मौजूद एमबीबीएस डाॅक्टर का सहायक हुं एवं यह सम्पति मेरी है। जबकी इसी झौलाछाप ने तारानगर विधानसभा 2018 का चुनाव लड़ा था उसमे अपने आप को नामाकन में आयुर्वेद डाॅक्टर लिखा था।

6 महीने पहले भी पढ़ा था इस क्लीनिक पर छापा तब कथित डॉ रमेश शर्मा ने बताया था अपने आपको आयुर्वेदिक डॉक्टर

इसी क्लीनिक पर संपर्क पोर्टल पर शिकायत होने के बाद 27 नवम्बर 2020 को ड्रगस इन्सपेक्टर ने जांच की थी, जिसमें इस कथित डॉक्टर ने आपने आप को आयुर्वेद डाॅक्टर बताया था और 2-3 दिन में अपने डिग्री एवं दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा था। उस समय भी जांच करने टीम ने लिपापोती की और खानापूर्ति करके वोटिंग चली गई जिसके चलते इस कथित डॉक्टर का साहस और बढ़ गया और लगातार यह डॉक्टर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करता रहा वही डॉक्टर द्वारा डिग्र्री, रजिस्ट्रेशन अब तक ना उपलब्ध करवाया गया ना ड्रग इंस्पेक्टर व स्वास्थ्य विभाग ने मांगे। तब अपने आप को डाॅक्टर बताने वाल कथित डाॅक्टर आज जब एक बार फिर से स्वास्थ्य विभाग की टीम का छापा पड़ा तो डॉक्टर होने से मुकर गया और अपने आप को सहायक बताने लगा ।

बड़ा सवाल ये सबूत होने के बाद भी क्यों नहीं करते विभाग के अधिकारी कार्रवाई

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आम जनता के स्वास्थ्य को लेकर काफी गंभीर है और सख्त हिदायत दे रखी एक ऐसे किसी भी झोलाछाप डॉक्टर यदि कोई करने जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए वही जिला कलेक्टर ने भी जिले भर में ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दे रखे हैं इसी के जब इस कथित डॉक्टर की शिकायत हुई तो जिला कलेक्टर ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया और कार्रवाई करने के निर्देश दिए लेकिन न जाने क्या गठबंधन है चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के साथ इस डॉक्टर का की तमाम सबुतांें के बाद भी ड्रग इंस्पेक्टर ने लीपापोती करते हुए इस अवैध क्लिनिक को सीज करने के बजाय गोलमाल कार्रवाई की है। मौजूद रोगियों को बाहर निकाल दिया गया। मौजूद लोगों के बयान नहीं लिए, झौलाछाप के विरूद्ध दस्तावेज भी नहीं लिए। कार्रवाई के नाम पर बताया कि दवाईयां मिली है।
ड्रग इंस्पेक्टर मनोज गढवाल ने बताया कि जिला कलेक्टर के आदेश के अनुसार हमें झौलाछाप डाॅक्टर द्वारा एलोपैथिक दवाईयां बेचने की जानकारी मिली एवं कलेक्टर सांवरमल वर्मा ने हमे जांच का आदेश दिया है। मैं एवं डाॅक्टर राजेश यहां आए। एमबीबीएस डाॅक्टर राजेन्द्र द्वारा यहां प्रेक्टिस करना पाया गया। मुझे पता चला कि डा.ॅ रमेश शर्मा के पास पहले आयुर्वेद रत्न की डिग्री थी, जिसे सुप्रिम कोर्ट ने 2010 में उस डिग्री को रद कर दिया था। उसके बाद से रमेश शर्मा के पास कोई डिग्री नहीं है। मिडिया से जब पूछा की 27 नवम्बर को आपके विभाग द्वारा जांच की गई थी तब डाॅक्टर रमेश शर्मा ने अपने आप को आयुर्वेद डाॅक्टर बताया था और दो-तीन दिन में डिग्री पेश करने की के लिए विभाग की जांच में लिखित में कहा था। उसका क्या हुआ। कुछ माह पूर्व जो अपने आप को आपके विभाग में लिखित में डाॅक्टर बताया व आज मात्र 6 महिने में मुकर रहा है। उसका क्या हुआ। तब ड्रग इंस्पेक्टर मनोज गढवाल ने कहा ने कहा कि मैं नया हुं, इसकी मुझ को जानकारी नहीं है मेरे विभाग के उच्च अधिकारियों को इससे अवगत करवा दुंगा। मरीजों के ब्यान क्यो नहीं लिए तो कहा कि मेरे अधिकार क्षेत्र में होगा वो करूगा। दवाईंय मिली है जो उचित होगा वो कार्रवााई करेंगे। क्लिनिक पर डाॅ. रमेश शर्मा का नाम लिखा उस पर कार्रवाई के बारे में कहा कि मैं इस मामले में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दुंगा। इस पर कार्रवाई की जाएगी, नोटिस देंगे, जिसका रमेश शर्मा को जवाब देना पड़ेगा। दवाईयां मिली है और दस्तोज भी लिए गए है। डाॅक्टर राजेन्द्र ने कहा कि मैंने अभी एसपी काॅलेज बीकानेर से एमबीबीएस किया है, तो इस क्लिनिक की साफ-सफाई आदि करने का कोरोना काॅल में समय नहीं मिला है।

कथित डॉक्टर झूठ का जाल बुनकर उलझा रहा है शिक्षा विभाग की टीम को

झौलाछाप कथित डाॅक्टर रमेश शर्मा ने सुप्रिम कोर्ट के आदेशों की अव्हेलना की है। तब उच्चतम न्यायालय में आयुर्वेद रत्न की डिग्री 2010 में रद्द कर दी थी तो उसका लगातार दुर्रपयोग क्यो किया। यहां तक की चूरू के निर्वाचन अधिकारी तक को विधानसभा उम्मीवार के रूप में अपने आप को आयुर्वेद डाॅक्टर बताया था। लगतार झुठ का जाल बुनता रहा। ड्रग इंस्पेक्टर मनोज गढवाल एवं डाॅक्टर राजेश कुमावत ने रमेश शर्मा के अवैध क्लिनिक पर लगे अवैध बोर्ड एवं मौजूद रमेश शर्मा एवं विभाग को लिखित में अपने आप को 6 माह पूर्व 27 नवम्बर को आयुर्वेद डाॅक्टर बताया था, वो सब नाकाफी लगा। अभी डाॅ. राजेन्द्र ने एमबीबीएस किया है तो पिछले बीस वर्षों से यहां कौन था। जो बार-बार अपने आपको डाॅक्टर कहने वाले रमेश शर्मा ने आज स्वीकार कर लिया कि मैं सहायक हुं। टाईम पास करने के लिए यहं बैठ जाता हुं। जिला कलेक्टर सांवरलमल वर्मा के प्रयास सराहनीय रहें मगर ड्रग माफियो के जाल को तौड़ने में समय लगेगा। अगर किसी निष्पक्ष अधिकारी से इमादारी से जांच करवाई जाती तो झौलाछाप को आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने के लिए आवश्य सजा मिलती।

हैरानी की बात तो यह है कि जांच करने आयी टीम को मौके पर क्लिनिक पर लगा बोर्ड भी नहीं दिखा ड्रग इंस्पेक्टर को और मौजूद झौलाछाप मिला जो आज सहायक हो गया, मरीजों के ब्यानों से दूरी रखी गई, स्थानीय निवासियों द्वारा दस्तावेज दिए जाने थे वो नहीं लिए गए। कलेक्टर के आदेश के बाद भी एक तरफा कार्रवाई की गई है। हालांकि कल तक तो नायक (डाॅक्टर) था आज वो सहायक हो गया। दस साल से जो अपने आपको डाॅक्टर कहता रहा उसने आज स्वीकार लिया की नहीं वो सहायक है। मगर जो दस वर्षों तक खिलवाड हुआ उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा, बीच बाजार में आज तक अपने क्लिनिक पर डा.रमेश शर्मा का बोर्ड लगा रहा तो क्या कर रहा था स्वास्थ्य विभाग का महकमा ओर क्या कर रहा था ड्रग विभाग। इसकी जवाबदेही तय कर के उस सिस्टम को बिगाड़ने वाले भ्रष्ट अधिकारियों पर भी क्या नहीं कसी जानी चाहिए जानी नकेल ।

डॉक्टर का चोला उतरने के बाद कथित डॉक्टर लगाने लगा मनगढ़ंत आरोप

झौलाछाप कथित डॉक्टर रमेश शर्मा ने जो कल तक अपने आपको डॉक्टर बता रहा था वह आज डॉक्टर होने से मुकर गया। ओर डाॅक्टर का चोला उतने पर मनगढ़ंत आरोप लगाने लगा और कहां कि यह मेरा अस्पताल है मैं अस्पताल में सैलेरी पर डाॅक्टर रखता हुं। जबकी अस्पताल का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। मैं यहा पर उल्टी साफ करता हुं, बीमारों को चाय पिलाता हुं। चिकित्सा इलाज क्या होता है मुझे इससे कोई मतलब ही नहीं है।

झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई होना आवश्यक है झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से ही है आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होने से रोका जा सकता है अन्यथा बेखौफ होकर यूं ही झोलाछाप डॉक्टर आम जनता की गाढ़ी कमाई लूटते रहेंगे और उनके स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ करते रहेंगे। कार्रवाई नहीं होने से इस प्रकार के झोलाछाप डॉक्टर बदस्तूर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते रहेंगें । कार्रवाई नहीं होने के चलते इन जैसे झोलाछाप डॉक्टरों का सास और बढ़ता गया। इसी का जीता जागता उदाहरण है सरदारशहर का यह कथित झोलाछाप डॉक्टर जो कार्रवाई नहीं होने के चलते यह आज भी सरदारशहर के मुख्य बाजार में अपनी दुकान चला रहा है और जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

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