राजस्थान अभी भी कुप्रथा से पिछड़ा हुआ है नागौर के एक जिले में ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमे एक पढ़ी लिखी ग्रेजुएट ने आत्महत्या कर ली, उसकी मौत के बाद सुसाइड नोट मिला जिसमे उसने सुसाइड करने की वज़ह आटा साटा की कुप्रथा को बताया। साथ ही उसने सभी भाइयों को कसम दी कि कोई भी अपनी बहन की चिता पर अपना घर नहीं बसाए आटा-साटा एक ऐसी कुप्रथा है, जहां लड़कियों की दो नहीं तीन से चार परिवारों के बीच सौदेबाजी होती है। वह भी सिर्फ इसलिए ताकि उनका नकारा और उम्रदराज बेटे की शादी हो जाए और उनके घर-परिवारों में दूसरे जो लड़के हैं, जिनकी किसी कारण से शादी नहीं हो पा रही है उनकी भी शादी हो जाए। वैसे राजस्थान के ज्यादातर गांवों में इस कुप्रथा का चलन है। ऐसे में पढ़ी-लिखी लड़कियों की जिंदगी भी खराब हो रही है। इस प्रथा का एक दर्दनाक सत्य यह भी है कि बेटी होने से पहले ही उसका रिश्ता तय कर दिया जाता है। यानी तय हो जाता है कि अगर बेटी हुई तो उसकी शादी इस भाई के बदले करेंगे। कई बार ऐसा भी होता है कि बेटी नहीं होती तो रिश्तेदार की बेटी को दबाव पूर्वक दिलाया जाता है, इस शर्त पर कि उन्हें भी वे बेटी दिलाएंगे। इस तरह यह कुप्रथा परिवार में कभी खत्म ही नहीं होती।