Bhilwara News । राजस्थान में भाजपा की सरकार हो या कांग्रेस की सरकार दोनों ही पार्टी की सरकार है और नेता हमेशा अपने चुनावी सभाएं हो या सार्वजनिक कार्यक्रम सभी ने यह राग अलाप ते हैं ।

प्रदेश के हर गांव में अब पानी की कोई समस्या नहीं है सभी जगह मीठा पीने का पानी उपलब्ध है विशेषकर भीलवाड़ा जिले के संदर्भ में दोनों ही दलों के नेता चंबल के पानी को लेकर डींगे हांकने से थकतेही नहीं है।

जबकि वास्तविकता यह है कि आजादी के बाद से लेकर आज तक भीलवाड़ा जिले का एक ऐसा गांव जो वर्तमान में राज्यपाल किस क्षेत्र में है इस गांव में मीठे पीने के पानी का अभाव है और इस गांव का हर पांच व्यक्ति चर्म रोग से ग्रसित है । यह राजस्थान का विकास।

जी हां यह सच है और यह गांव है भीलवाड़ा जिले के बदनोर क्षेत्र के गालियां खेड़ा पंचायत का मोती मगरी का इस गांव में सरसों लोगों की बस्ती है और यह गांव पूर्व मंत्री भाजपा के कद्दावर नेता तथा वर्तमान में पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह के क्षेत्र में पड़ता है और आश्चर्य की बात है कि आजादी के बाद आज तक इस गांव में पीने के मीठे पानी की कोई व्यवस्था नहीं है।

अगर मीठा पानी चाहिए तो गांव से 3 किलोमीटर दूर पैदल चलकर एक या दो घडे मीठा पानी लाया जा सकता है।

इस गांव के 3 किलोमीटर के दायरे में करीब 70 पानी की कुए हैं जो 400 फीट की गहराई के कई ट्यूबेल भी है लेकिन यहां के ग्रामीणों को मीठा पानी नसीब नहीं हो रहा है क्योंकि यहां की जमीन में फ्लोराइड की मात्रा सर्वाधिक है।

हाई फ्लोराइड पानी से नहाने और पीने से ग्रामीण रोग के शिकार हो चुके हैं यहां तक कि इस गांव में रहने वाला हर पांचवा व्यक्ति चर्म रोग का शिकार हो चुका है ।लेकिन इसके बाद भी ग्रामीणों की मजबूरी है इस हाइट फ्लोराइड पानी के उपयोग करने की।

चबंल परियोजना फिर भी मीठा पानी नसीब नही

ग्रामीणों का कहना है कि मोती मगरी गांव को अभी तक सरकार की ओर से राजस्व गांव में नहीं लिया गया है और इससे भी बड़ी बात यह है कि इस गांव के समीप ही चंबल परियोजना गुजर रही है ।

लेकिन इस गांव के बाशिंदों को आज तक मीठे पानी का फायदा नहीं मिल पाया है और मजबूरन ग्रामीणों को इस गांव से दूर 3 किलोमीटर दूर स्थित एक मीठे पानी के कुए से पानी भरकर लाना पड़ता है और चंबल परियोजना होने के बाद भी मीठे पानी को तरसना पड़ रहा है ।

मीठे पानी के अभाव के कारण हालात यह है कि इस गांव में कोई बतौर मेहमान आने के लिए तैयार तक नहीं है ।