Marudhar Desk: बुधवार को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा में भारी चूक देखने को मिली। गंभीर चूक इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी जिस फ्लाईओवर पर फंसे थे, वो पाकिस्तान की सीमा से बहुत ज्यादा दूर भी नहीं था। इतना ही नहीं, ये गंभीर चूक इसलिए भी है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इसे अपनी जान का खतरा बताया। उन्होंने पंजाब सरकार के अधिकारियों से कहा कि वो अपने सीएम को थैंक्स कहें क्योंकि मैं बठिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा लौट पाया। आपको बता दें कि ये पहली बार था जब किसानों की नाराजगी सहने और किसान बिलों को वापिस लेने के बाद पीएम मोदी पंजाब जाकर किसानों से सीधा संवाद करने जा रहे थे। तय था कि पीएम हेलिकॉप्टर से जाएंगे लेकिन मौसम बिगड़ा हुआ था जिस वजह से उन्हें बठिंडा से सड़क मार्ग से जाना था। जिसके बाद गाडियों का रैला निकला बठिंडा से फिरोजपुर की तरफ। जहां लोग पीएम मोदी का इंतजार कर रहे थे। पीएम के सड़क मार्ग से जाने की जानकारी राज्य सरकार को दी गई थी या नही इसको लेकर भी सवाल खडे हो रहे है। इस पर पंजाब की चन्नी सरकार का कहना है कि हमें तो उस रुट की जानकारी दी ही नही गई जिससे पीएम मोदी को फिरोजपुर जाना था। इस बीच रैली से पहले तय हुआ कि हुसैनीवाला स्थित राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाए। बठिंडा से इसी रास्ते पर पीएम का काफिला फिरोजपुर के लिए रवाना हुआ। लेकिन लगभग 30 किलोमीटर पहले फ्लाईओवर पर पहुंचते हैं तो गाड़ियां ही गाडियां दिखाई देती है, बताया गया कि ये गाडियां प्रदर्शनकारियों की हैं। लेकिन प्रोटोकॉल के मुताबिक जो रुट लगा दिया जाता है उसपर फिर आधे घंटे पहले से गाडियों की आवाजाही पुलिस की निगरानी में होती और फिर 10 मिनट पहले पूरी तरह बंद कर दी जाती है। लेकिन सोशल मीडिया पर जो तस्वीरें आई उसमें लोग पीएम मोदी के काफिले को दिखा रहे हैं। यानी आम लोग प्रधानमंत्री मोदी के काफिले से ज्यादा दूर नहीं थे। जिसके बाद बड़ा सवाल खड़ा होता है कि पुलिस की मौजूदगी होने के बावजूद भी ये गाड़ियां, बस, ट्रक यहां कैसे पहुंचे…? ये फ्लाईओवर 30 किलोमीटर दूर है हुसैनीवाला सीमा बॉर्डर से, हालातों को देखते हुए पीएम का काफिला बठिंडा वापिस निकल पड़ा… और इसके बाद पीएम ने पंजाब सरकार के अधिकारियों से कहा कि वो अपने सीएम को थैंक्स कहें क्योंकि मैं बठिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा लौट पाया। बस यहां से सियासत गरमा गई। सवाल उठने लगे कि क्या वहां स्थिति वाकई में ऐसी बन गई थी कि प्रधानमंत्री की जान को खतरा बन गया था…. जबकि बताया गया था कि बठिंडा से लेकर फिरोजपुर तक पीएम की सुरक्षा में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है और ड्रोन के जरिए भी निगरानी रखी जा रही है। तो फिर चूक आखिर कहां हुई। दो साल के लंबे समय के बाद पीएम ने पंजाब की ओर रुख किया था। कैबिनेट में तीन कृषि कानूनों को रखने के बाद पीएम ने पंजाब की तरफ मुहं तक नही किया। आंदोलन के जरिए ही सही लेकिन पंजाब के लोग ही दिल्ली तक आए लेकिन पीएम ने उनसे बात करने इच्छा जाहिर नही की। पिछले एक साल में हर मौसम को सर्दी, गरमी, बरसात को किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर बैठ कर देखा है। तो क्या किसानों का ये गुस्सा अभी तक है, पीएम के माफी मांगने और बिलों को वापिस लेने के बाद भी है… या गुस्सा इस बात का है कि किसानों की घर वापसी के समय जो वादे किए गए वो पूरे नही हुए, चाहे वो एमएसपी पर कानून का हो, पुलिस केस अभी तक वापिस नही लिए गए, लखीमपुर खीरी मामले में मंत्री का इस्तीफा क्यों नही हुआ इन सब मुद्दों को लेकर किसानों में अभी भी गुस्सा है और गुस्सा भी इतना है कि उन प्रदर्शनकारियों को पीएम के काफिले को रोकने तक ले आया। अब राज्य सरकार का कहना है कि अचानक पीएम का रुट बदला गया जिसकी जानकारी नही दी गई, सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के लिए वक्त नही मिला। लेकिन गृह मंत्रालय का कहना है कि पूरी जानकारी दी गई थी और जानकारी के बावजूद इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्विट कर कहा कि मुख्यमंत्री ने तो फोन तक नही उठाया। बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि ये तो कांग्रेस की साजिश है। पंजाब अब पूरी तरह चुनावी रंग में रंग चुका है। पंजाब की एक तस्वीर पर गौर किया जाए तो जो अकाली दल बरसों से भाजपा के साथ था आज वो भाजपा से अलग हो चुका है तो वहीं दूसरी तरफ कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में होने वाले पंजाब चुनाव में अब कैप्टन अपनी अलग पार्टी बना चुके है और बरसों तक कांग्रेस का हाथ थामे कैप्टन ने आज कांग्रेस का हाथ छिटककर भाजपा का दामन थाम लिया है। इस बार होने जा रहे पंजाब चुनाव में काफी कुछ बदल गया है और टकराव और समीकरण की नई परिस्थितियां पंजाब में बन गई है। अब चुनावी माहौल में दो बरस बाद पीएम मोदी का पंजाब में जाना और उसपर भी रैली का रद्द हो जाना .. ये अपने आप में कई सवाल खड़े कर देता है। हालांकि, पीएम मोदी पंजाब के लिए हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं को शुरू करने के लिए गए थे। लेकिन सवाल ये है कि क्या वाकई पीएम मोदी इन विकास परियोजनाओं को शुरु करने जा रहे थे या फिर रुठे हुए पंजाब के किसानों को मनाने का एक और प्रयास करने जा रहे थे। क्योंकि, कृषि कानूनों के बाद पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में हालात ऐसे बन गए थे कि कई क्षेत्रों में भाजपा के नेताओं का जाना दूभर हो गया था। तो अब जब चुनाव नजदीक है और पीएम की रैली रद्द हो गई है.. इसके बाद सवाल ये है कि क्या वाकई में सुरक्षा में चूक होना, प्रदर्शनकारियों का सड़क रोक लेना, सीएम चन्नी का टेलीफोन न उठाना, और सबसे बड़ी बात पीएम मोदी का ये कहना कि मैं जिंदा बचके वापिस आ गया। क्या ये सब चुनाव से जुड़ा हुआ है या वाकई में ऐसी स्थिति बन गई थी। एक तस्वीर ये भी सामने आई कि पीएम की रैली में कुर्सियां खाली पड़ी दिखाई दी, तो क्या मौसम खराब होने की वजह से लोग कार्यक्रम स्थल तक नही पहुंच पा रहे थे….सवाल ये भी उठ रहा है कि लोगों के न पहुंचने की वजह से, खाली पड़ी कुर्सियों की वजह से इस रैली को रद्द कर दिया गया। क्योंकि, एक दिन पहले तस्वीरें ऐसी भी दिखाई दी थी जब पीएम मोदी के स्वागत में लगाए गए पोस्टर फाड़े जा रहे थे। जहां 2 लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद थी वहां नजारा कुछ ऐसा था … खाली पड़ी कुर्सियां … अब सवाल ये भी खड़ा हो रहा है कि मौसम रुठा हुआ था या पंजाब का किसान रुठा हुआ था…। खैर, रैली रद्द हो गई और पीएम वापिस दिल्ली लौट आए और कहा मैं जिंदा लौट आया। अब इतनी बड़ी बात पीएम ने कही तो इसकी जांच तो जरुर होनी चाहिए। ऐसे में चाहे राज्य सरकार को या गृह मंत्रालय को लेकिन अपने प्रयासों से इस बात की तह तक जाना चाहिए कि क्या वाकई पीएम की जान को खतरा था। क्यों कि ये देश कई साल पहले भी इसी तर्ज पर अपने एक प्रधानमंत्री को खो चुका है।