Jodhpur: राजस्थान की राजनीति में गुटबाज़ी की खबरें बेहद आम हैं। खासकर प्रदेश कांग्रेस में गहलोत खेमे और सचिन पायलट कैंप के बीच तनाव की स्थिति बनी ही रहती है। हालांकि, गुटबाज़ी की खबरों को न सीएम गहलोत और न सचिन पायलट ने स्वीकारा है। मंत्रिमंडल विस्तार के समय भी पायलट ने पत्रकार वार्ता के दौरान ये कहा था कि कांग्रेस में कोई गुट नही है, कांग्रेस पार्टी में सभी एक है। लेकिन अक्सर देखा गया है कि तस्वीर नेताओं के बयान के उलट ही नज़र आती है। पायलट के गुटबाज़ी की खबरों को नकारने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सलाहकार बनाए गए निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा का बयान सामने आया था। जिसमें उन्होनें पायलट पर आरोप लगाया था कि उन्होनें मंत्रिमंडल विस्तार के समय कांग्रेस आलाकमान को गुमराह किया है। अब प्रदेश कांग्रेस में गुटबाज़ी की खबरों को हवा देने वाली एक और तस्वीर सामने आई है। जब जोधपुर के सर्किट हाउस में आरसीए अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बटे वैभव गहलोत और पायलट खेमें से वन व पर्यावरण मंत्री हेमाराम चौधरी एक ही समय पर मौजूद रहे। लेकिन दोनों ने न तो एक-दूसरे से बात की और न ही मुलाकात की। जबकि सर्किट हाउस में मंत्री हेमाराम चौधरी और आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत के बीच केवल दो कमरों का फासला था। इतना ही नहीं, गहलोत गुट के कई स्थानीय नेता वैभव गहलोत से मिलने तो पहुंचे, लेकिन उसी समय वहां मौजूद मंत्री हेमाराम से शिष्टाचार भेंट तक करने नहीं गए। जबकि हेमाराम चौधरी मंत्री बनने के बाद पहली बार जोधपुर आए थे। चर्चा तो ये भी है कि वैभव गहलोत सर्किट हाउस में मंत्री चौधरी को अनदेखा कर निकल गए। आपको बता दें कि ऐसा सिर्फ वैभव गहलोत ने ही नही किया बल्कि राजस्थान राज्य बाल आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल ने भी मंत्री हेमाराम चौधरी से शिष्टाचार भेंट करना मुनासिब नही समझा। जिसके बाद सियासी हल्कों में चर्चाएं तेज़ हो गई है। प्रदेश कांग्रेस में ऑल इज़ वेल होने के दावे एक बार फिर खोखले साबित होते दिखाई दे रहे है।