“अवसाद” को गंभीरता से लेने की जरूरत, अपनों से करें दिल खोल कर बात…

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मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या कर दुनिया को अलविदा कह दिया था। अब 16 साल की टिकटोक स्टार सिया कक्कड़ ने भी आत्महत्या कर ली है। आत्महत्या करने के पीछे सबसे बड़ा कारण होता है मानसिक तनाव। आज जिस तरह के दौर से पूरी दुनिया गुजर रही है उसमें मानसिक तनाव का बढ़ना जायज है। कोरोना महामारी और लॉकडाउन के बाद लाखों लोगों की जिंदगी बर्बाद हो गई है। न जाने कितने ही लोगों की नौकरियां छीन गई है। कितने ही गरीब मजदूरों का काम छिन गया है। जब इंसान के पास काम नहीं होता तो हो और भी अधिक परेशान हो जाता है। ऐसे में मानसिक सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। हमें सिर्फ यह समझना है की हर समस्या का समाधान मौजूद होता है। जरूरत है हमें हर समस्या को प्राथमिकता से समझने की।  अब शायद एक ऐसी बीमारी है जो अमीर गरीब छोटे बड़े का भेदभाव नहीं करती।

अक्सर हम यह सोचते हैं कि जिसके पास पैसा है उसे किसी तरह की परेशानी कैसे हो सकती है लेकिन हमारी यह सोच बिल्कुल गलत है। क्योंकि अवसाद एक ऐसी बीमारी है जो किसी खास वजह से नहीं होती। बल्कि यह तो किसी भी बात को लेकर हो सकती है। अक्सर हमने लोगों को कहते सुना है कि कोई भी बात अपने दिल में ना रखें। अपनों से हर बात साझा करें। लेकिन आमतौर पर ऐसा होता नहीं है। लोग अक्सर किसी से बिना कुछ कहे अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं। क्योंकि लोगों के अंदर इस बात का डर होता है कि अगर कहीं मैंने इसे यह बात बता दी तो ये मेरे बारे में क्या सोचेगा। या फिर कोई भी मेरी परेशानी समझ नहीं पाएगा। ऐसे में जरूरत है कि आप अपनी तरफ से पहल करें और अवसाद से घिरे व्यक्ति से सकारात्मक बात करें। यदि आप खुद मानसिक परेशानी से जूझ रहे हैं तो बिना झिझक किए अपनों से इस बारे में बात करें और अपनी तकलीफ किसी ऐसे व्यक्ति से साझा करें जो आपको और आपकी परेशानी को समझ सके।