परिवार का पेट पालने के लिए एमएससी, बीएड शिक्षक सब्जी बेचने को मजबूर…

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मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। देश में फैले कोरोना संकट ने लोगों के सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर दिया है। इस विपदा की घड़ी में लोग रोजी रोटी के संकट से जूझ रहे हैं। पैसे पैसे के लिए मोहताज आम व्यक्ति हाथ फैलाने पर मजबूर हो गया है। शहर से लेकर गांव तक कोरोना महामारी का असर दिखाई दे रहा है इस महामारी का असर लोगों के जनजीवन पर पड़ा है। एमएससी, डबल एमए , बीएड जैसी बड़ी-बड़ी डिग्रियां हासिल किए बच्चों का भविष्य संवारने वाले शिक्षक आज सब्जी बेचने पर मजबूर है। दूसरों का भविष्य संवारने वाले शिक्षकों का भविष्य अंधकार में जाता दिखाई दे रहा है। ऐसी ही एक तस्वीर सामने आ रही है राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले से।  47 वर्षीय नंदलाल खटीक गांधीनगर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में किराए के मकान पर रहते हैं। नंदलाल खटीक ने बीएससी, एमएससी और बीएड की पढ़ाई की है और एक प्राइवेट स्कूल में अध्यापक है। लेकिन जब से देश में लॉकडाउन लागू हुआ है तब से वह बिल्कुल बेरोजगार हो गए हैं। उन्होंने बताया कि 15 मार्च से उनके पास ना तो नौकरी है और ना ही पैसा। स्कूल बंद होने से उन्हें सैलरी भी नहीं मिली है। नंदलाल घर पर ही साइंस और मैथ्स का ट्यूशन भी पढ़ाते हैं। लेकिन कोरोना महामारी के चलते अभिभावक अपने बच्चों को घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। जिस वजह से उनके पास ट्यूशन के लिए भी बच्चे नहीं आ पा रहे हैं। इस संकट की घड़ी में ना तो पैसा है, ना नौकरी है। परिवार का पेट पालना मुश्किल हो गया है, थक हारकर नंदलाल ने अब सब्जी बेचना शुरू कर दिया है। अध्यापक नंदलाल खटीक ने बताया कि उनका 5 सदस्यों का परिवार है जिस में उनकी तीन बेटियां हैं। बच्चों की भूख मिटाने के लिए सब्जी बेचने को मजबूर शिक्षक नंदलाल ने बताया कि सुबह जल्दी उठकर सब्जी मंडी से सब्जी लाते हैं। सुबह 7:30 बजे से शाम के 7:00 बजे तक गलियों में घूम घूम कर सब्जी बेचते हैं। सब्जी बेचकर जैसे तैसे परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। हालांकि इतनी मुसीबत आने पर भी शिक्षक नंदलाल हिम्मत नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि जल्द ही सब ठीक हो जाएगा और वह फिर से स्कूल में बच्चों को पढ़ाएंगे।