मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। देश में इन दिनों करीब ६० दिनों से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी किसान संगठन अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए है और सरकार पर तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने को कह रहे है। इतना ही नहीं इन दिनों कृषि कानून के खिलाफ विरोध सड़को से लेकर संसद तक जारी है। किसान संगठनों के साथ साथ विपक्षी पार्टियां भी कृषि कानून को रद्द करने की मांग को लेकर मोदी सरकार को घेरते नजर आ रहे है। बहरहाल इसी बीच कृषि कानून को लेकर दुनिया के सबसे बड़े देश अमेरिका का मोदी सरकार को समर्थन मिलता नजर आ रहा है।

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सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार बता दें कि हाल ही में अमेरिका ने कृषि कानूनों को लेकर भारत का समर्थन किया है। बाइडन प्रशासन ने कहा कि वह मोदी सरकार के इस कदम का स्वागत करता है। इससे दुनिया में भारतीय बाजार का प्रभाव बढ़ेगा और निजी क्षेत्र में अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे। साथ ही अमेरिका ने यह भी स्वीकार किया कि कृषि कानूनों पर शांतिपूर्ण विरोध एक संपन्न लोकतंत्र की एक बानगी है। साथ ही देश में हो रहे कृषि कानून के खिलाफ विरोध में अमेरिका ने कहा कि किसी भी विवाद या प्रदर्शन को लेकर दोनों पार्टियों में चर्चा होनी चाहिए और बातचीत के जरिए मसले का हल निकलना चाहिए।

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इसके अलावा अमेरिका के विदेश मंत्रालय की ओर से बयान आया कि हमें लगता है कि शांतिपूर्ण तरीके से जारी प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है, भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी बात को कहा है। अगर दोनों पक्षों में मतभेद है तो उसे बातचीत के जरिए हल करना चाहिए। बहरहाल बता दें कि कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 26 नवंबर से किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली में हिंसा भी हुई थी, जिसके बाद कई जगहों पर इंटरनेट सेवा को बाधित किया गया।