मास्क, पीपीई किट या ग्लव्स को इस्तेमाल के बाद नहीं किया गया डिस्पोज़, तो बढ़ सकता है अधिक खतरा..

0
40
covid-19-mb-9

मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल देश में कम से कम प्लास्टिक का इस्तेमाल करने की देशवासियों से अपील की थी। लेकिन उस समय पीएम मोदी को इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा कि एक ऐसी महामारी आएगी जिससे बचने के लिए सिर्फ प्लास्टिक का ही इस्तेमाल होगा। दिसंबर महीने में चीन के वुहान सिटी से निकला कोरोना वायरस कुछ ही दिनों के भीतर दुनिया के कई बड़े देशों में फैल गया। 30 जनवरी को देश में भी पहला कोरोना पॉजिटिव मरीज मिला। कोरोना महामारी के शुरू होते ही दुनिया भर में पीपीई किट्स, मास्क, ग्लव्स, फेस शिल्ड आदि चीजों की मांग बढ़ गई। यह ऐसी चीजें हैं जो इस जानलेवा महामारी से बचाने में कारगर है। लेकिन यह सभी चीजें ही प्लास्टिक से बनती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान अनुसार दुनिया भर में हर महीने कोरोना महामारी से निपटने के लिए 90 लाख मास्क, 76 लाख ग्लव्स और 16 लाख गॉगल्स की जरूरत पड़ती है। अकेले भारत में ही रोजाना 4.5 लाख पीपीई किट्स बन रही हैं।

कोरोना महामारी से बचने के लिए हम इन सभी चीजों का इस्तेमाल तो कर रहे हैं लेकिन बड़ी और गंभीर समस्या इस प्लास्टिक को डिसपोज करना है। एक स्टडी के अनुसार 2022 तक हमारे देश से रोजाना 750 टन से ज्यादा मेडिकल वेस्ट निकलेगा। फिलहाल रोजाना 550 टन से ज्यादा मेडिकल वेस्ट भारत में निकल रहा है। बता दें कि दुनिया भर की सभी सरकारों ने कोरोना से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट को डिस्पोज करने के लिए गाइडलाइंस जारी की हुई है। इसके तहत कोरोना वार्ड से जो भी मेडिकल वेस्ट निकलता है उसे एक बैग में रखकर उस पर कोविड-19 वेस्ट लिखा जाता है। कोरोना से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाली सभी चीजें प्लास्टिक से बनती है इन्हें एक बार इस्तेमाल करने के बाद डिस्पोज करना बेहद जरूरी है। कोरोना वार्ड में काम करने वाले सभी डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ को भी यही सलाह दी जाती है कि कोरोना से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सभी सेफ्टी इक्विपमेंट्स बाहर निकलने के बाद उतार दें, संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। एक स्टडी के अनुसार कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में आने के बाद पीपीई किट पर वायरस 4 दिन तक जिंदा रह सकता है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि स्वस्थ लोगों को कोरोना से बचने के लिए कपड़े का मास्क पहनना चाहिए क्योंकि यह धुलने के बाद दोबारा पहना जा सकता है। पीपीई किट, ग्लव्स, मास्क आदि चीजें भले ही उतार कर डस्टबिन में फैंक दिए जाए लेकिन फिर भी इनसे संक्रमण के फैलने का खतरा बना रहता। है इसलिए कोविड वार्ड में इस्तेमाल होने वाले सभी सेफ्टी इक्विपमेंट्स का सही से डिस्पोज होना बेहद जरूरी है।