Marudhar Desk: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर सियासी घमासान चरम पर पहुंच गया है। सभी पार्टियां चुनावी मैदान में कूद पड़ी हैं। हर पार्टी अपनी-अपनी जीत के दावे कर रही है और अपने हिसाब से समीकरण बनाने और दूसरे का बिगाड़ने में लगी हुई हैं। इस बीच जनता की जुबान पर एक ही सवाल है कि आखिर यूपी विधानसभा चुनाव-2022 का विजेता कौन होगा, किस पार्टी की जीत होगी, किसको हार का मुंह देखना पडेगा। कौन नेता बाज़ीगर माना जाएगा, किसकी जमीन खिसक जाएगी? ऐसे अनेक सवाल हैं, हालांकि चुनावों में जीत का सेहरा किसके सिर सजेगा इसका फैसला जनता को ही करना है। उत्तर प्रदेश में कुल 404 विधानसभा सीटें हैं जिनमें 403 का चयन मतदाता के द्वारा किया जाता है। वही एक विधानसभा सदस्य आंग्ल भारतीय सदस्य के रूप में मनोनयन होता है। बहुमत के लिए किसी भी दल को 202 विधानसभा सदस्यों की आवश्यकता होती है। इस समय वहां योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार है। इसमें अपना दल भी शामिल है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगियों ने 324 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इनमें से 312 सीटें बीजेपी ने अकेले जीती थीं। विधानसभा का कार्यकाल मई 2022 तक का है। उत्तर प्रदेश के चुनाव में 2017 में जहां मुद्दे अलग थे। वही अखिलेश यादव की सरकार के विकास के दावों को जनता ने सिरे से खारिज कर दिया था। इस बार बीजेपी की सरकार ने क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग मुद्दों को उठाकर चुनाव में जीत दर्ज करने की रणनीति बनाई है तो वहीं समाजवादी पार्टी अपनी पूर्ववर्ती सरकार में किए गए विकास कार्यों और भाजपा से किसानो की नाराजगी, कानून व्यवस्था की खामियों को प्रमुख मुद्दा बनाया है। जबकि इस बार बहुजन समाज पार्टी अपने खोते हुए जनाधार को बचाने के लिए मैदान में उतरेगी। वहीं कांग्रेसी की डूबती नैया को पार लगाने के लिए पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी लगातार उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं। लखीमपुर खीरी जैसे मुद्दे को भुनाने कोशिश में जुटी हुई है। वही वह इस चुनाव में सॉफ्ट हिंदुत्व के मुद्दे के जरिए भी अपनी जमीन को दोबारा तैयार करने में जुटी हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के 2022 के चुनाव के लिए कांग्रेस को छोड़कर भाजपा, सपा और बसपा के मुख्यमंत्री पद के लिए नाम जग जाहिर है। भाजपा फिर दोबारा योगी आदित्यनाथ के नाम पर दोबारा चुनाव में उतरेगी। तो वहीं समाजवादी पार्टी का सीएम चेहरा अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी से मायावती के नाम हैं। जबकि कांग्रेस में अभी कोई नाम तय नहीं किया है। वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने का वादा करने वाली कांग्रेस को महिलाएं ही नहीं मिल रहीं हैं। यूपी चुनाव में टिकट के लिए स्क्रीनिंग कमेटी के पास जो आवेदन आए हैं, उसमें महिलाएं गिनी-चुनी ही हैं। ऐसे में अब कांग्रेस के सामने महिलाओं को विधानसभा में टिकट देने में मशक्कत करनी पड़ रही है। चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, नेताओं के बयानों में हिंदू-मुस्लिम का ज़िक्र भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस चुनाव में ध्रुवीकरण का दांव भी ख़ूब चलेगा।