Marudhar Desk: राजस्थान में 6 जनवरी को शहीद स्मारक पर बेरोजगारों की रीट भर्ती परीक्षा में पद बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे शौर्य चक्र सम्मानित विकास जाखड़ को जिस तरह से विधायकपुरी पुलिस ने गिरफ्तार किया, अपमानित किया और बदसलूकी की गई उसे देखकर यह कतई नहीं लगता है कि राजस्थान में संवेदनशील, जवाबदेही और पारदर्शी शासन देने का दंभ भरने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का शासन है। बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे विकास जाखड़ सहित करीब आधा दर्जन युवाओं को गिरफ्तार कर आवाज कुचलने का काम किया है। यह सरकार के सुशासन और जवाबदेही प्रशासन के दावे पर करारा तमाचा है। जहां एक और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुरूवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पे्रेस कांफ्रेस के लिए जा रहे थे ठीक उसी समय विधायकपुरी पुलिस ने आंदोलन कर रहे युवाओं को गिरफ्तार किया। इतना ही नहीं बल्कि पुलिस की बर्बरता की हद तब हो गई जब इस घटना का कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों के साथ भी पुलिस ने अभद्र व्यवहार किया और उनके कैमरे, मोबाइल छीनकर वीडियो, फोटो डिलीट कर दिए। यह घटना खाकी के ध्येय के मुताबिक सही नहीं कही जा सकती। अपनी मांगों या हकों को लेकर आवाज उठाने और आंदोलन करते का हर नागरिक को अधिकार है और यह संविधान में उलिखित है। आम नागरिक के साथ राजस्थान की पुलिस किस तरह का सलूक करती होगी जब देश की रक्षा की खातिर नक्सलियों को मार गिराने वाले जाबांज और शौर्य चक्र विजेता विकास जाखड़ के साथ जिस तरह पुलिस ने धक्का मुक्की और गिरफ्तार किया उससे हर देशवासी की भावनाओं को गहरा धक्का लगा है। बता दें कि 23 नवंबर 2016 को झारखंड के लातूहर जिले में नक्सलियों से संघर्ष करते हुए करीब 7 नक्सलियों को मार गिराया था, उन्ही विकास जाखड़ को एक शांतिपूर्ण आंदोलन करने के चलते न केवल गिरफ्तार किया बल्कि बदसलूकी की जो एक राष्ट्रीय गौरव का बड़ा अपमान है। इस तरह से राजस्थान की खाकी की ओर से गुरूवार को की गई बर्बरता और दुर्व्यवहार ने लोगों की भावनाओं को गहरा आघात पहुंचाया है इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री को दोषी पुलिसकर्मियों के विरूद्धकार्रवाई करना चाहिए।