दिल्ली हिंसा पर गृहमंत्री अमित शाह ने अपनाया सख्त रुख….

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मरुधर बुलेटिन न्यूज़ डेस्क। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा में चार दिन बाद कमी आई है। हिंसा के चौथे दिन गुरुवार को कोई भी बड़ी घटना सामने नही आई है। गुरुवार के दिन आम लोगों का जीवन पटरी पर लौटता दिखा। लोग दफ्तरों , दुकानों व काम काज आदि के लिए घर से बाहर निकले। हिंसा के बाद गलियों में सड़को पर सब कुछ बिखरा पड़ा हुआ है। लोग तितर-बितर हुए जीवन को समेटने में लगे है। दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर भड़की हिंसा में अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है । जबकि 250 से ज्यादा लोग घायल हुए है और घायलों को दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल व एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं ,हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों को उनके शव लेने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्ट्म के बाद ही परिजन शव ले कर जा सकते है। जिस वजह से मारे गए लोगों के परिजनों को बेहद दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों जैसे जाफराबाद ,चांदबाग , मौजपुर , भजनपुरा आदि में 23 फरवरी को हिंसा बढ़की थी। जिसमें आगजनी ,पथराव , गोलियां आदि चलाई गई थी। लेकिन गुरुवार को इसमें काफी कमी आई है। इसके बावजूद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह किसी भी प्रकार की कोई ढ़िलाई नही बरतना चाहते है। इसी वजह से गुरुवार को भी गृहमंत्रालय में गुरुवार को बैठकों का दौर चला। जिसमें गृह सचिव अजय कुमार भल्ला, पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक और विशेष आयुक्त कानून-व्यवस्था एसएन श्रीवास्तव इन बैठकों में शामिल रहे। बैठक में शाह ने कड़ा रुख अपनाते हुए निष्पक्ष जांच करने व अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए है। अमित शाह द्वारा कड़ा रुख अपनाने के बाद दिल्ली पुलिस ने जांच के लिए दो विशेष जांच टीम (एसआइटी) गठित करने का एलान किया है। बैठकों में अमित शाह ने साफ कर दिया कि हिंसा में जिम्मेदार कोई भी दोषी बचना नही चाहिए। साथ ही हिंसा , तोड़फोड व आगजनी के मामलों में 48 एफआइआर दर्ज की जा चुकी है जबकि पांच सौ से ज्यादा लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया जा चुका है।