जयपुर। अखिल भारतीय गुर्जर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं समाजसेवी रवि शंकर धाभाई ने आज ट्विटर एवम मेल के माध्यम से एक मांग पत्र डॉ विनय पी. सहस्रबुद्धे अध्यक्ष संसदीय स्थाई समिति, राज्य सभा कमेटी विभाग (ईडब्ल्यूसीवाई एवम एस) एवम श्री धर्मेंद्र प्रधान केंद्रीय मंत्री शिक्षा, भारत सरकार नई दिल्ली को भारत के विद्यालय पाठ्यक्रम में भारतीय इतिहास गौरवशाली परंपरा को स्थापित करने के संदर्भ में राज्य सभा के सचिवालय द्वारा मांगे गए सुझाव पर गुर्जर इतिहास भाषा साहित्य संसदीय स्थाई समिति शिक्षा महिला बाल विवाह खेल मामला, भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा हाल ही में रिफॉर्म्स इन द करंट एंड डिजाइन ऑफ स्कूल टेक्सटबुक्स के लिए सुझाव के परिपेक्ष में सुझाव मांगे थे ।

इस संदर्भ में गुर्जर इतिहास साहित्य एवं भाषा शोध संस्थान सीकर और अखिल भारतीय गुर्जर परिषद, दिल्ली द्वारा लिखे 19 पेज के पत्र के तथ्यों को अखिल भारतीय गुर्जर महासंघ द्वारा भी इस संबंध में मांग पत्र भेज अपनी सहमति जताई हैं । सामाजिक कार्यकर्ता रवि शंकर धाभाई ने अपने पत्र में बताया कि भारत का इतिहास कुछ चाटुकार इतिहासकारों द्वारा लिखा गया । इतिहास में इतनी विसंगतियां हैं की यह इतिहास इस प्रयास के अंतर्गत जानबूझकर इतिहास में विसंगतियां उत्पन्न कर दी गई है और न ही भारतवर्ष के यथार्थ इतिहास को पुस्तकों में समावेशित किया गया है । इतिहासकारों को गंभीरतापूर्वक चिंतन मनन करते हुए यथा सम्पूर्ण इतिहास का पुनः लेखन करने की तुरंत आवश्यकता है।

अखिल भारतीय गुर्जर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष समाज सेवी रवि शंकर धाभाई ने खुली चेतावनी दी है कि अब गुर्जर समाज के महापुरुषों के इतिहास के साथ छेड़खानी अब बर्दाश्त नही होगी एवम तथ्यों को गलत पेश करना सहन नहीं करेगा और इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

गुर्जर इतिहास की सत्य हकीकत उजागर की है और केंद्र सरकार से गुर्जर इतिहास को महत्त्व देकर पाठ्यपुस्तक मे तुरंत प्रभाव से शामिल करने करने की मांग की है।

अंग्रेजों से गुर्जरों का संघर्ष

उत्तर प्रदेश के कुंजा बहादुरपुर की राजा विजय सिंह पंवार ने 1822 से 1824 के मध्य अपने सेनापति कल्याण सिंह के साथ मिलकर अंग्रेजों से संघर्ष करना शुरू कर दिया था। विजय सिंह राजा ने अंग्रेजों को लगान देना बंद करके अंग्रेजों से कई गांव छीन लिए थे।
धन सिंह कोतवाल मेरठ का संघर्ष अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति में मेरठ के कोतवाल धन सिंह गुर्जर चपराना गोत्र में क्रांति की मशाल जलाकर जेल में कैद क्रांतिकारियों को मुक्त कराया।

रवि शंकर धाभाई ने अपने पत्र में गुर्जर समाज के महापुरुषों का अंग्रेजों से संघर्ष के बारे में भी अवगत कराया है जिसमें राजा सिंह पवार, धन सिंह कोतवाल सूबा देवहंस धौलपुर, राव उमराव उमराव सिंह दादरी, विजय सिंह पथिक सरदार पटेल, एवं गुर्जर वीरांगनाओं वह महिलाओं का देश भक्ति का संघर्ष और बलिदान के रूप में पन्नाधाय गुजरी का बलिदान, रामप्यारी गुर्जर का तैमूर लंग से संघर्ष। माली गुजरी जम्मू एंड कश्मीर गुर्जर समाज की महिला वीरांगना मृगनयनी गुर्जर ग्वालियर ग्वालियर की राई गांव की रहने वाली थी। ग्वालियर के राजा मान सिंह द्वारा जंगली भैंसों का शिकार करने पर नाकामी मिलने पर मृगनयनी ने उस जंगली भैंसे को मार गिराया था जिस पर मान सिंह ने शादी का प्रस्ताव रखा। धोला गुजरी दिल्ली की निवासी थी वर्तमान धौला कुआं उसी के नाम पर है जो आज गुड़गांव से दिल्ली प्रवेश करते समय आता है उन्हीं के नाम से प्रसिद्ध हुआ। अहिल्या बाई होलकर इंदौर के महाराजा यशवंत राव होल्कर की रानी थी।

सम्राट नागभट्ट प्रतिहार सम्राट राजा मिहिर भोज, पूर्व मध्य युग से आधुनिक काल तक गुर्जर क्षत्रियो का इतिहास एवम वंश परमार, कुषाण, हूण, गुर्जर प्रतिहार, चौहान, तोमर एवं बप्पा रावल एवं शिवाजी वंश तथा यवनों तुर्की अरबों से गुर्जरों का संघर्ष के बारे में भी इस पत्र में विस्तार से उल्लेख किया गया है।