बतौर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर गोविंद सिंह डेटासरा को एक साल पूर्ण हो गया है। एक साल पहले 14 जुलाई 2020 को कांग्रेस सरकार पर आए सियासी संकट के दौरान सचिन पायलट और उनके गुट के विधायकों के बगावत के बाद मानेसर चले जाने के बाद गोविंद डोटासरा को पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान सौंपी गई थी।

पीसीसी अध्यक्ष की कमान संभालन के साथ ही डोटासरा के सामने सबसे बड़ी चुनौती भंग पड़े संगठन को खड़ा करने की थी, उन्हें बिना संगठन के ही निकाय और पंचायत चुनावों में पार्टी को उतारना पड़ा, जिसमें उन्होंने पहली बार शहरी निकायों में पार्टी को जीत दिलाई और प्रदेश में हुए विधानसभा उपचुनाव में भी अच्छा प्रदर्शन किया। हालांकि उन्हें कार्यकारिणी गठन करने में छह महीने का वक्त लगा।

जबकि एक साल में पार्टी को एकजुट करने का डोटासरा दावा करते रहे, लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियां नहीं होने के कारण पार्टी एक बार फिर बंटी हुई नजर आ रही है। यहीं नहीं, एक साल बाद भी जिला और ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्तियां नहीं होना पाना साफ बता रहा है कि अभी डोटासरा को पार्टी को एकजुट करने में थोड़ा वक्त और लग सकता है।

अपने एक साल के कार्यकाल के दौरान डोटासरा खेमों में बंट चुकी कांग्रेस को ना तो एकजुट कर पाए और ना ही गुटबाजी खत्म करने के लिए कोई प्रयास किया। हाल ही सचिन पायलट कैंप और अशोक गहलोत कैंप के नेताओं के बीच जमकर बयानबाजी चल रही है, लेकिन सियासी बयानबाजी पर लगाम लगाने के लिए पीसीसी चीफ डोटासरा ने कोई कड़ा रुख नहीं अपनाया।

पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के लिए जिलों में संगठनात्मक ढांचा खड़ा कर उन्हें मजबूत करना सबसे बड़ी चुनौती है, ऐसे में जिला और ब्लॉक लेवल पर जल्द से जल्द नियुक्तियां कर उन्हें अभी से 2023 की जंग के लिए तैयार करना भी डोटासरा के लिए बड़ी चुनौती है।

पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं, विधानसभा उपचुनाव के दौरान ‘नाथी का बाड़ा’ बयान को लेकर वे काफी चर्चाओं में थे। इसके साथ ही वह कई बार भाजपा नेताओं से भी ट्विटर पर भिड़ चुके हैं। वहीं पीसीसी चीफ डोटासरा पूरी प्रदेश कांग्रेस और मंत्रिमंडल में एक मात्र नेता हैं जो लगातार आरएसएस और भाजपा पर हमलावर रहते हैं, संघ-भाजपा पर हमला करना का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं।

अब पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा असली अग्नि परीक्षा 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव हैं, जहां उन्हें पार्टी को जीत दिलाकर फिर से सत्ता में लाने की रहेगी।