Jaipur: कई उतार-चढ़ाव देखने वाले किसान आंदोलन को एक साल पूरा हो गया है। हलधर की हठ के आगे सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए और तीन कृषि कानून वापिस लेने का ऐलान कर दिया। लेकिन किसान अभी भी दिल्ली की सीमाओं पर डटा हुआ है। नए कृषि कानूनों की वापसी की प्रक्रिया भले ही शुरू हो गई, लेकिन MSP समेत दूसरी मांगों को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी है। किसानों का कहना है कि जब तक तीनों कानूनों को संसद में वापिस नही ले लिया जाता और एमएसपी पर कानून नही बना जाता तब तक वे अपने घरों को नही लौटेंगे। 27 नवंबर को किसान संयुक्त मोर्चा आंदोलन की आगे की रणनीति तैयार करेगा। दिल्ली-एनसीआर के चारों बार्डर (सिंघु, टीकरी, शाहजहांपुर और गाजीपुर) पर बैठे किसान आखिर कब धरना प्रदर्शन खत्म करेंगे, इसको लेकर शनिवार को दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बार्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की अहम बैठक आयोजित की गई है। इसमें आंदोलन की आगे की रुप रेखा तैयार होगी। देश के कोने कोने तक हर दिशा में किसान आंदोलन को पहुंचाने की रणनीति तैयार हो चुकी है। एक बार फिर किसान पूरी ताकत के साथ दिल्ली घेरने की कोशिश में है, मांग यही है जबतक एमएसपी पर कानूनी. गारंटी नहीं तब तक दिल्ली की घेरेबंदी जारी रहेगी। वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा ने संसद सत्र शुरू होने पर 29 नवंबर से हर दिन सिंघु और टीकरी बॉर्डर से 500-500 किसानों के साथ संसद तक ट्रैक्टर मार्च करने का कार्यक्रम तय किया हुआ है। इसके साथ ही आज बड़ी संख्या में किसानों की भीड़ जुटाने का दावा किया है। इसको देखते हुए दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा पुलिस भी अलर्ट हो चुकी है। बता दें कि शुक्रवार की सुबह तक हजारों की संख्या में और भी किसान टीकरी बॉर्डर पर पहुंचे हैं। किसान अपने साथ राशन-पानी सब लेकर आए हैं। इससे साफ है कि किसानों ने आंदोलन को खत्म करने की बजाय आगे भी जारी रखने की रणनीति बनाई है। 50 से ज्यादा ट्रैक्टरों में पंजाब से किसान सिर्फ खाद्य सामग्री ही लेकर पहुंचे हैं। किसान नेता पहले ही कह चुके हैं कि MSP की गारंटी कानूनी और अन्य मांगों को मनवाने तक आंदोलन जारी रहेगा।