Delhi: तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का विधेयक संसद में पारित भी हो गया है। किसानों की जो मांग थी कानून वापसी की वो सरकार पूरा कर रही है। लेकिन पिछले एक साल से चला आ रहा किसान आंदोलन कब खत्म होगा…. कब किसान घरों को वापसी करेंगे। …. क्या किसान आंदोलन यूं ही चलता रहेगा.. कई सवाल है जो सबके ज़हन में है। लेकिन इन सवालों के बीच एक बड़ा सवाल ये भी खड़ा हो गया है कि क्या किसान नेताओं के बीच फूट पड़ गई है। खबरें आ रही है कि किसान आंदोलन को लेकर पंजाब संगठनों के किसान नेता नरमी दिखा रहे है तो वहीं किसान नेता राकेश टिकैत अभी आंदोलन वापसी के मूड में नही है। ऐसे में अब किसान आंदोलन क्या मोड़ लेता है इसको लेकर 1 दिसंबर को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक बुलाई गई है। बता दें कि संसद में तीनों केंद्रीय कानूनों के वापसी के फैसले के बाद ही किसानों के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई। वहीं, दिल्ली-हरियाणा सिंघु बार्डर पर मौजूद किसानों का कहना है कि अब सरकार ने तीनों कानून वापस ले लिए और केंद्र सरकार द्वारा अन्यों मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया गया है। ऐसे में धरना प्रदर्शन खत्म कर आंदोलन वापस लिया जाना चाहिए। वहीं, राकेश टिकैत का कहना है कि सरकार 4-5 तारीख तक आंदोलन खत्म कराने की कोशिश करेगी। लेकिन किसान संगठनों में कोई फूट नहीं है। न कोई यहां से जाने को तैयार है। जब तक एमएसपी पर गारंटी नही मिलती, कोई किसान आंदोलन से जाने को तैयार नही है। टिकैत ने कहा जब तक मुकदमे वापिस नही हो जाते तब तक हम वापिस नही जाएंगे। राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार चाहती है कि बिना बातचीत किए आंदोलन खत्म हो जाए। देश में कोई आंदोलन या धरना न हो। बातचीत का रास्ता बंद हो जाए। सरकार इस गलतफहमी में न रहे। सरकार से बात किए बिना हम नहीं जाएंगे। सरकार को चाहिए कि बातचीत करके मामला निपटा ले। उन्होंने कहा कि हम सरकार से बात करने को तैयार हैं। सरकार जहां बुलाएगी हम वहां बात करने जाएंगे।