मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में भले ही शिक्षा का स्तर बढ़ा हो। लेकिन भौतिक सुविधाओं का अभी तक अभाव है और स्कूलों में इन सुविधाओं की व्यवस्था करवाने का प्रयास विभाग सीएसआर के जरिए कर रहा है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए शिक्षा विभाग ने विद्युत नियामक आयोग को प्रस्ताव भेजा है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो प्रदेश के ऐसे सरकारी स्कूल जो बिना बिजली संचालित किए जा रहे हैं। उनमें विद्युत की समस्या दूर हो सकेगी। जानकारी के मुताबिक शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने हाल ही में विद्युत नियामक आयोग के सामने एक प्रस्ताव रखा है। जिसके मुताबिक आयोग की ओर से बड़ी कम्पनियों में जो पैनल्टी लगाई जाती है वह पैनल्टी अब आयोग स्कूलों में सोलर प्लांट लगाने के रूप में लगाए। यानि जिस कम्पनी पर पैनल्टी लगाई गई है उसे पैनल्टी के रूप में स्कूल में सोलर प्लांट लगाने होंगे। जिससे पैनल्टी भी लग जाएगी और स्कूलों को सोलर प्लांट के रूप में बिजली भी मिल सकेगी।

आएंगे सकारात्मक परिणाम

गौरतलब है कि पहले सीएसआर की अनिवायज़्ता नहीं होने के कारण बजट मिलने में समस्या होती थी। लेकिन अब दो फीसदी की अनिवायज़्ता के बाद शिक्षा विभाग लोगों से सम्पर्क कर रहा है और स्कूलों को भी इसका फायदा मिला है। स्कूलों में विकास कार्य होने लगे हैं और अब इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने विद्युत नियामक आयोग के समक्ष प्रस्ताव रखा है कि अगर वह बड़ी कम्पनियों पर पैनल्टी के रूप में स्कूलों में सोलर प्लांट लगाने की पैनटी लगाए तो स्कूलों में बिजली की समस्या दूर हो सकेगी।