Marudhar Desk: देश में एक बार फिर कोरोना महामारी का संकट गहराने लगा है। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन के बढ़ते खतरे को देखते हुए राज्य सरकारें अलर्ट मोड़ पर आ गई गई है। कई राज्यों ने तो पाबंदिया लगाना भी शुरु कर दिया है। देश में एकाएक बढ़े ओमिक्रोन के मामलों को देखते हुए चिंता की लकीरें खिंचना वाजिब भी है। लेकिन जहां एक तरह देश में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन का कहर बढ़ता जा रहा है, जहां कोरोना की तीसरी लहर का खतरा अब बढ़ने लगा है। वहीं चुनाव प्रचार में जुटी राजनीतिक पार्टियां सभी नियमों को ताक पर रखते हुए जोरों-शोरों से पार्टी प्रचार में लगी हुई है। चाहे बात मास्क लगाने की हो या सामाजिक दूरी की लेकिन चुनावी प्रचार में सभी नियमों की धज्जियां उड़ती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों को लेकर चाहे भारतीय जनता पार्टी हो, या फिर कांग्रेस, या समाजवादी पार्टी या अन्य राजनीतिक पार्टी सभी खुलेआम कोरोना से बचाव के अन्य मानकों की जमकर अवहेलना कर रहे हैं। चुनावी प्रसार में ज्यादा से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटाने के प्रयास किए जा रहे है। रैलियों में खूब भीड़ उमड़ रही है, वहीं मास्क और सोशल डिस्टेंसिग नदारद है। रविवार को कांग्रेस की महिला मैराथन हो या उन्नाव में अखिलेश यादव की रैली, यहां कोविड प्रोटोकॉल का पालन होता नहीं दिखा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हरदोई में रोड शो में भी लोग कोविड के खतरे को लेकर बेपरवाह नजर आए। गौरतलब है कि देशभर में बढ़ते कोरोना के मामलों के मद्देनजर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यूपी चुनाव टालने और रैलियों पर तुरंत पाबंदी लगाने का का आग्रह किया था। क्योंकि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान उत्तर प्रदेश में जो हालात बने थे उनसे प्रदेश सरकार की भी खूब किरकिरी हुई थी। अस्पतालों पर जमकर सवाल खड़े किए थे। ये बात भी पूरा देश नही भुला सकता है कि बंगाल चुनाव ने देश में बहुत लोगों को संक्रमित किया था और दूसरी लहर ने न जाने कितनें घरों के चिराग बुझा दिए, कितनों से अपनों को छीन लिया। जिसे देखते हुए हाईकोर्ट के जज ने कहा था कि जान है तो जहान है। अगर रैलियों को नहीं रोका गया तो परिणाम दूसरी लहर से भी बदतर होंगे। हालांकि सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम पर कायम रह सकता है। कल सरकार ने उन पांच राज्यों में कोविड की स्थिति की समीक्षा बैठक की, जहां चुनाव होने वाले हैं। बैठक के बाद सरकार ने कहा कि उन राज्यों में जहां अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं, वहां कोरोना वायरस का टीकाकरण बढ़ाया जाना चाहिए।