कोरोना का आस्था पर असर, 26 साल में पहली बार रद्द हुई प्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा..

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मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। देश में विकराल रूप धारण कर चुका कोरोना का असर सभी चीजों पर साफ दिखाई पड़ रहा है। लोगों के जन जीवन के साथ-साथ इस महामारी का असर उनकी आस्था पर भी पड़ा है। भक्तों और श्रद्धालुओं के लिए जिस भगवान के कपाट हमेशा खुले रहते थे वह भी इस महामारी में बंद हो गए। कोरोना का असर उदयपुर में पिछले 26 साल से हो रही भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथ यात्रा पर भी पड़ा है। साल 1995 में रथ यात्रा की शुरुआत की गई थी। इससे पहले 368 वर्ष पुरानी परंपरा चली आ रही थी। जिसमें भगवान को रथ में विराजित कर मंदिर परिसर में परिक्रमा करवाई जाती थी। इस बार देश में पाबंदियों के चलते पुरानी परंपरा के अनुसार ही भगवान जगन्नाथ को रजत रथ में विराजित का मंदिर परिसर में परिक्रमा करवाई जाएगी।

जगदीश मंदिर के पुजारी हुकुमराज, रामगोपाल के अनुसार एकादशी की पूजा के बाद परंपरागत तरीके से भगवान जगन्नाथ के रथ साफ-सफाई और उसका रंग रोगन किया जाएगा। भगवान के इस रथ को तैयार होने में 5 दिन का समय लगेगा। परिक्रमा से पहले रथ का शुद्धिकरण भी किया जाएगा। गंगाजल, पंचगव्य गंगाजल का छिड़काव कर प्रभु के रथ का शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके बाद हवन पूजा की जाएगी। आषाढ़ शुक्र बीज के दिन प्रभु रथ पर विराजमान होंगे। बता दें कि प्रभु के विराजित होने से पहले रथ को इत्र, मोगरा, गुलाब के फूल से सजाया जाएगा। राजस्थान में लॉकडाउन के नियमों की पालना में गहलोत सरकार ने 30 जून तक मंदिर और धार्मिक स्थलों को बंद किया है। ऐसे में जगदीश मंदिर के कपाट भी भक्तों के लिए नहीं खुल पाएंगे। लेकिन भक्त 23 जून को प्रभु की मंदिर परिक्रमा के लाइव दर्शन कर सकेंगे। इस पूरे कार्यक्रम को मंदिर से ही फेसबुक पर लाइव किया जाएगा।