Marudhar Desk: राजस्थान में कोरोना की तीसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है। लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामले और ओमिक्रोन के मामलों से सरकार भी अब एक्शन मोड में दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोरोना समीक्षा की बैठक कर अधिकारियों को निर्देश दे चुके है कि वैक्सीनेशन प्रोग्राम को रफ्तार दी जाए, साथ ही नाईट कर्फ्यू समेत कोरोना गाइडलाइन का सख्ती से पालन किया जाए। राजस्थान में कोरोना के मामलों ने रफ्तार पकड़ ली है। नवंबर माह के मुकाबले दिसंबर महीन में कोरोना के केस 4 गुना और मौत 8 गुना तक बढ़ गई। नवंबर में कुल 365 केस आए थे, जो दिसंबर में बढ़कर 1442 हो गए। वहीं मौत का आंकड़ा भी 1 से बढ़कर 9 पर पहुंच गया। वहीं, सामने आ रहे ज्यादातार मामलों में किसी भी तरह के लक्षण दिखाई नही दे रहे है। प्रदेश में सबसे ज्यादा मामले राजधानी जयपुर में सामने आ रहे है। राज्य में जितने भी केस दिसंबर में मिले हैं, उसमें 56 फीसदी केस केवल जयपुर के है। जयपुर में दिसंबर माह में कोरोना संक्रमण के 1,442 मामले सामने आ चुके है। वहीं, जयपुर के अलावा राजस्थान में कोरोना का दूसरा बड़ा सेंटर जोधपुर है, जहां एक महीने में 118 केस मिले हैं। हालांकि, खतरे के बीच राहत की खबर भी सामने आई है। राज्य सरकार की ओर से पिछले दिनों 14 जिलों में कराए गए सीरो सर्वे में 90 प्रतिशत से ज्यादा लोगों में कोरोना से लड़ने की एंटीबॉडी मिली है। वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके उनमें एंटीबॉडी का लेवल 91 फीसदी और जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई उनमें नेचुरल एंटीबॉडी का लेवल 74 फीसदी तक मिला है। सर्वे की ये रिपोर्ट दर्शाती है कि प्रदेश अब हर्ड इम्यूनिटी की ओर बढ़ रहा है। वहीं, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुधीर भंडारी का कहना है कि एंटीबॉडी विकसित होने का मतलब यह नहीं है कि आपको कोरोना नहीं हो सकता। कोविड प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन और पूरी सावधानी बरतने की जरूरत है। एंटीबॉडी विकसित होने का मतलब यह नहीं है कि हम लापरवाह हो जाए।