Jaipur: अमर मेडिकल रिसर्च सेंटर यानि धोखा..। यह हम नहीं कह रहे है बल्कि यह कहना है यहां भर्ती मरीजों के परिजनों का जिन्होंने कैशलेस इलाज के नाम पर अपने रोगी परिजनों को यहां भर्ती तो करवा दिया लेकिन उन्हें सिर्फ धोखा ही मिला। एक बार इस अस्पताल के जाल में फंसने के बाद मरीजों के परिजनों के पास जेब कटवाने के अलावा कोई चारा ही शेष नहीं रह जाता। जानकारी के अनुसार यहां सरकारी योजनाओं के तहत कैशलेस इलाज के नाम पर मरीजों को भर्ती कर लिया जाता है और इसके बाद शुरू होता है अमर मेडिकल रिसर्च सेंटर का लूट का खेल। यहां मरीजों के परिजनों को महंगी दवाएं लाने के लिए बाध्य किया जाता है और इसकी उन्हें कोई रसीद या बिल तक नहीं दिया जाता। यहां तक कि मरीज के इलाज के दौरान इस दवा का कोई उपयोग हुआ भी है या नहीं, इसका भी कोई उल्लेख नहीं किया जाता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि इस अस्पताल में अगर मरीज एक बार इनके जाल में फंस जाता है तो उसका निकलना काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसे कई मामले सामने आए है और परिजनों ने इसकी शिकायत की है लेकिन इनकी कहीं भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं चिकित्सा विभाग भी इस अस्पताल की करतूतों पर आंखें मूंदे बैठा है। मोटे तौर पर कहा जाए तो यह अस्पताल सिर्फ जुमले बाजी कर पैसे बटोरने का काम करता है। मरूधर बुलेटिन रिपोर्टर ने अमर मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर पर मरीजों के प्रति संस्थान की संवेदनशीलता को जानने के लिए अस्पताल में भर्ती मरीजों से और उनके परिजनों से बात की। इसी पड़ताल में यह चौंकाने वाले खुलासे हुए है। अस्पताल संचालक के द्वारा मरीजों से तो विश्वासघात करने की बात सामने आ ही रही है, साथ ही मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके अलावा अमर मेडिकल रिसर्च सेंटर मानसरोवर का एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। जानकारी के अनुसार सरकारी डॉक्टरों की मिलीभगत से पूरा अस्पताल चलाया जा रहा है। पड़ताल में सामने आया है कि यहां सरकारी डॉक्टर खुद ही मरीज भेजते है और खुद ही इलाज करने पहुंच जाते है। पूरे खेल के अनुसार मरीज को पहले सरकारी अस्पताल में बुलाया जाता है और फिर वही से उसको गंभीर बीमारी का भय दिखाकर प्राइवेट अस्पताल में भेज दिया जाता है। सरकारी चिकित्सक द्वारा कहा जाता है, आप प्राइवेट अस्पताल पहुंचिए मैं वही आकर आपका ईलाज कर दूंगा। कुछ सरकारी डॉक्टर तो ऐसे भी है जो नियमित रूप से अपनी सेवाएं प्राइवेट अस्पताल में दे रहे है, जिसमें एसएमएस और जेके लोन अस्पताल के डॉक्टर शामिल है। आपको बता दें कि मरुधर बुलेटिन द्वारा अमर मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर की पोल खोलने के बाद अब अस्पताल ने सतर्कता बरतते हुए अपने अप्रशिक्षित और नौसीख्यिा स्टाफ को नाइट ड्यूटी पर लगा दिया है। गौरतलब है कि मरुधर बुलेटिन के स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा किया गया था कि किस प्रकार यहां ज्यादातर स्टॉफ अस्पताल में बिना डिग्री, डिप्लोमा के ही कम वेतन में काम कर रहा है। यहां तक कि स्टाफ को ना तो समय पर वेतन दिया जाता है और ना ही छुट्टियां मिलती है। इस अस्पताल के आईसीयू तक में पर्याप्त और प्रशिक्षित स्टाफ नहीं है। हैरान कर देने वाली बात ये है कि आईसीयू में भर्ती मरीजों की देखरेख के लिए आईसीयू वार्ड में पर्याप्त स्टॉफ ना होने के कारण उनके इलाज में लापरवाही बरती जाती है। इस खुलासे के बाद अस्पताल अपने खिलाफ कार्रवाई को लेकर सतर्क हो गया है।