Jaipur: 26 सितंबर को सबसे बड़ी भर्ती परीक्षा रीट का आयोजन हुआ। इसमें लेवल-1 में बीएड योग्यता रखने वाले लगभग 9 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए। इसको लेकर बीएसटीसी अभ्यर्थियों ने विरोध शुरू कर दिया। विरोध के बाद ये पूरा मामला राजस्थान हाईकोर्ट में पहुंचा। जहां दोनों पक्षों की ओर से सुनवाई की गई। हाईकोर्ट के जज अकील कुरैशी और सुदेश बंसल की खंडपीठ ने गुरुवार के दिन फैसला सुनाया। कोर्ट ने एनसीटीई के नोटिफिकेशन को अव्यवहारिक बताते हुए बीएसटीसी अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला दिया। अब रीट की पात्रता पा चुके बीएड अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती के लिए सिर्फ लेवल-2 में ही आवेदन कर सकेंगे। हाईकोर्ट के फैसले के बाद दोनों परीक्षा देने वाले करीब 9 लाख अभ्यर्थी लेवल-1 के लिए अयोग्य ठहरा दिए गए हैं। बता दें कि एनसीटीई (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन) ने साल 2018 में एक नोटिफिकेशन जारी कर बीएड डिग्रीधारकों को भी REET लेवल प्रथम के लिए योग्य माना था। एनसीटीई ने यह भी कहा था कि अगर बीएड डिग्रीधारी लेवल-1 में पास होते हैं, तो उन्हें नियुक्ति के साथ 6 माह का ब्रिज कोर्स करना होगा। एनसीटीई के इस नोटिफिकेशन को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। बीएड डिग्रीधारियों ने भी खुद को REET लेवल प्रथम में शामिल करने को लेकर याचिका लगाई। इस पर फैसला नहीं हो पाया। रीट लेवल-1 में बीएड अभ्यर्थियों को शामिल करने के लिए याचिका लगाने वालों का कहना है कि हाईकोर्ट के फैसले को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। ताकि प्रदेश के लाखों बीएड धारियों को एक मौका मिल सके।