Marudhar Desk: साल 2022 में उत्तर प्रदेश में चुनाव होने जा रहे है लेकिन सियासत अभी से ही गर्म होने लगी है। राजनीतिक पार्टियों के बीच वार पलटवार का सिलसिला जारी है। बीते दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) पर करारा हमला करते हुए कहा कि अपनी तिजोरी भरने और आतंकवादियों पर मेहरबानी दिखाने के लिए सत्ता चाह रहे ‘लाल टोपी’ वाले लोग उत्तर प्रदेश के लिए ‘खतरे की घंटी’ हैं। अब पीएम मोदी के इस बयान पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पलटवार किया है। अखिलेश यादव ने कहा कि पहले ये बात सीएम करते थे, अब पीएम भी करने लगे हैं। अखिलेश ने कहा कि लाल रंग धर्म का है, बीजेपी के लोग इसे नहीं समझ सकते। यादव ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाषा बिगाड़ रहे हैं, क्योंकि उन्होंने अपने वादे पूरे नहीं किए, इसलिए उन्हें भाषा बदलनी पड़ी है। अखिलेश यादव ने कहा, ‘ये लाल रंग इमोशन का रंग है, लाल रंग क्रान्ति का प्रतीक है, लाल रंग बदलाव का प्रतीक है। वो जानते हैं इस बार यूपी में बदलाव होने जा रहा है। ये एक रंगी लोग भावनाएं नहीं समझ सकते.’ अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार का क्या स्तर है? ये पॉलिटिकल भाषा हो सकती है, सरकार की नहीं। सरकारी अकाउंट से इन बातों को कहा जाए तो इसे क्या कहेंगे? टोपी और लुंगी चुनावी मुद्दे नहीं हो सकते. यूपी की जनता बदलाव चाहती है, जो वादे किये वो पूरे नहीं किए इसलिए भाषा बदलेगी। बता दें कि पीएम मोदी के लाल टोपी के बयान के बाद गरमाई सियासत के रंग दिल्ली तक दिखने लगे है। आज संसद भवन परिसर में विपक्ष के प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के सांसद लाल टोपी पहनकर पहुंचे। वहीं पीएम के इस बयान के बाद आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने काली टोपी वाली तस्वीर ट्वीट करके बीजेपी पर हमला बोला था।