48 घंटे में एक बार पानी, वह भी दूषित और बदबू युक्त

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मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। कस्बे में पेयजल किल्लत के चलते ग्रामीणों को फ्लोराईड युक्त व गंदा पानी पीना पड़ रहा है। नगर पालिका सहित आसपास के क्षेत्र में पेयजल का संकट बना हुआ है। हालत यह है कि 48 घंटे में एक बार पानी की सप्लाई हो रही है, जो भी 30 से 25 मिनट के लिए इसमें जिसने पानी भर लिया, उतना ठीक है और जो पानी नहीं भर पाया। वह अगले 48 घंटे और पानी आने का इंतजार करता रहता है। लोग महंगे भाव अदा कर टैंकरों से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। पानी की किल्लत का कारण यह है कि आबादी बढ़ती जा रही है और पानी की उत्पादकता कम होती जा रही है। मौजूदा स्थिति में अब जब पानी की मांग भी बढ़ती जा रही है, जिस घर में बूस्टर की व्यवस्था नहीं है, वे लोग सुबह-सुबह दो तीन बाल्टी पानी का संग्रहण कर पाते है।

पानी की उत्पादकता कम
पानी की उत्पादकता कम होने की वजह से कस्बे में जलदाय विभाग की ओर से 48 घंटे में एक बार सुबह केवल 30 से 25 मिनट ही नलों में पानी दिया जा रहा है। कई जगहों पर तो वह भी पहुंचते-पहुंचते मात्र 5 मिनट ही पानी मिल पाता है। यदि मकान ऊंचाई पर है तो उसके यहां एक दो बाल्टी भी पूरी तरह नहीं भर पा रही है, आधा पानी भी नहीं मिल पा रहा है। आबादी के हिसाब से प्रतिदिन लगभग 3 हजार 788 लीटर पानी की आवश्यकता है। जबकि जलदाय विभाग की ओर से प्रतिदिन एक हजार लीटर पानी की सप्लाई की जा रही है यानि आधे से भी कम मात्रा में पानी सप्लाई हो रही है।

जलदाय विभाग की अनदेखी, टेंकरों से बुझ रही है पानी की प्यास
कस्बे में जलदाय विभाग की ओर से हो रही आधी सप्लाई में भी पानी का काफी दुरूपयोग हो रहा है। क्योंकि विभाग की अनदेखी के कारण कस्बे में आधे से भी ज्यादा मकानों के जल कनेक्शन फर्जीवाड़े में ही चल रहे है। इस मामले में विभाग का कहना है कि शीघ्र ही पुलिस विभाग की मदद लेकर फर्जी कनेक्शनों का सर्वे कर हटाया जाएगा। पानी की सप्लाई कम होने से आमजन 300 से 450 रुपए खर्च कर पानी के टेंकरों से पानी खरीद कर अपनी प्यास बुझा रहे है। इतना महंगा पानी गरीब और मध्यम श्रेणी के परिवारों की उम्मीदों पर पानी फेरने के समान है।

वर्तमान में पेयजल व्यवस्था
वर्तमान में जलदाय विभाग के पास लोगों को पानी सप्लाई देने के लिए 2 दर्जन ट्यूबवैल है। जिनमें भी 8 ट्यूबबैल पूर्णरूप से सूख कर नकारा हो चुके हैं। कई ट्यूबबेलों का तो बिजली कनेक्शन भी कटवा जा चुका है, शेष में भी पानी की आवक कम हो गई है। 75 हजार से 5 लाख लीटर पानी की क्षमता के चार उच्च जलाशय है तथा 3 भूतल जलाशय एक झाग स्टैड पर, दूसरा सरकारी स्कूल के पीछे तथा तीसरा भूतल जलाशय लोहरवाड़ा में है। पूरे पालिका क्षेत्र में 20 हैंडपंप रिकार्ड में है। लेकिन वे सभी पानी सूखने या रख-रखाव के अभाव में नाकारा पड़े हुए है। जहां हैंडपंप दुरुस्त है वहा लोगों की काफी भीड़ जमा रहती है, जलदाय विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि हाल ही में कस्बे में पानी की गंभीर समस्या वाली जगहों पर, जिसमें रामदेव कॉलोनी, रैगरों का मोहल्ला, नायक मोहल्ला, घटाला कॉलोनी, डाकबेल तथा श्याम विहार कॉलोनी में लगभग 5-6 नए सिंगल फेस के ट्यूबबैल लगाए गए। लेकिन विद्युत विभाग की ओर से विद्युत कनेक्शन जारी नहीं होने से नाकारा पड़े हुए है।

नलों में गंदा पानी
कस्बे के लालकोठी क्षेत्र में नलों से दूषित एवं बदबू युक्त पानी आ रहा है। लोगों ने जलदाय विभाग के कर्मचारियों को आगाह किया कि, कई पर पाईप लाइन लिकेज के माध्यम से नालीयों में बहने वाला पानी पेयजल के साथ मिलकर घरों तक पहुंच रहा हैं। इसके बावजूद कर्मचारी गंदे पानी को रोकने की दिशा में कोई काम नही कर रहे, जिससे क्षेत्र में बिमारी फैलने का अनदेशा बना हुआ है। साथ ही उक्त पानी पीने के उपयोग में भी नही आ रहा है, जिससे आमजन परेशान है।