नो स्कूल नो फीस की मांग पर पहली बार 31 को होगा स्वेच्छिक राजस्थान बंद, कई संगठन उतरे समर्थन में

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मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। कोरोना और लॉकडाउन जैसी विपदा से बिगड़े व्यापारिक हालातों में भी निजी स्कूल संचालक इंसानियत और मानवता को शर्मशार करते हुए लगातार अभिभावकों को फीस जमा करवाने का दबाव बना रहे है। जिसको लेकर अभिभावकों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री तक को ज्ञापन भेंजे, यही नहीं नो स्कूल नो फीस की मांग को लेकर अभिभावकों के विभिन्न समूह कई बार राजस्थान के शिक्षा मंत्री से भी मिले पर शिक्षा मंत्री ने भी जब तक स्कूल ना खुले तब तक फीस जमा करवाने के आदेश दिए। अगर कोई स्कूल फीस की मांग करता है तो कार्यवाही के निर्देश भी दिए। किन्तु निजी स्कूल संचालकों के आगे शिक्षा मंत्री की भी नहीं चली और लगातार मनमर्जी बढ़ती चली गई। शिक्षा अधिकारियों को शिकायत दर्ज करवाने के बावजूद आज तक कार्यवाही नही हुई और ना ही अभिभावकों को सम्मान मिला।

ऐसे में अभिभावको के हितों के लिए कार्यरत संयुक्त अभिभावक समिति ने “नो स्कूल नो फीस” की मांग को लेकर सोमवार 31 अगस्त को स्वेच्छिक राजस्थान बंद का आह्वान किया। जिसको लेकर शनिवार को पिंकसिटी प्रेस क्लब पर संयुक्त अभिभावक समिति के पदाधिकारियों और समर्थन देने वाले सभी जनप्रतिनिधियों ने पत्रकार वार्ता को संबोधित कर अभिभावकों की पीड़ा को पत्रकारों से साझा किया।

वार्ता के दौरान समिति संयोजक सुशील शर्मा एवं प्रवक्ता ईशान शर्मा ने बताया कि स्कूल मालिक लगातार फीस जमा करवाने का दबाव डाल रहे है। सरकार कोई निर्णय नही ले रही ऐसे में प्रदेश का अभिभावक अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहा है और सरकार की चुपी से अपने आपको अपमानित महसूस कर रहा है। सत्ता की आगोश में सोई पड़ी सरकार ऐशो- आराम की नींद से जागे और राजधर्म का पालन करते हुए निजी स्कूलों पर लगाम कसे, पूर्व की भांति जब तक स्कूल नहीं खुले तब तक फीस नही के स्थगित आदेश की बजाय फीस माफी की घोषणा की जाए। इसी मांग को लेकर सोमवार 31 अगस्त को स्वेच्छिक राजस्थान बंद का आह्वान किया गया है। जो पूरी तरह से प्रदेश के डेढ़ करोड़ अभिभावकों के साथ शांतिपूर्ण बन्द रखकर अपना विरोध दर्ज करवाया जाएगा।

समिति महामंत्री मनीष विजयवर्गीय ने बताया कि बंद के समर्थन को लेकर समिति पदाधिकारियों ने राजस्थान और जयपुर के व्यापार मंडलो, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क साधकर अभिभावकों की पीड़ाओं से अवगत करवाया और बन्द में शामिल होने की अपील की। जिसको लेकर प्रदेशभर के 450 से अधिक संगठनों ने बंद का समर्थन करते हुए अपील जारी करते हुए संयुक्त अभिभावक समिति का साथ दिया। अभी तक राजस्थान बन्द में जयपुर व्यापार, व्यापार मंडल, आल राजस्थान दुकानदार महासंघ, श्री राजपूत करणी सेना, अंतराष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ, अखिल भारतीय दिगम्बर जैन युवा एकता संघ, अखिल भारतीय पुलक जनचेतना एवं राष्ट्रीय जैन महिला जागृति मंच, भारतवर्षीय अभिभावक संघ, ढूंढाड़ परिषद, देने का सुख परिवार, राजस्थान अभिभावक संघर्ष समिति, जैन समाज, ब्राह्मण समाज, जाट समाज, अग्रवाल समाज, कायस्थ समाज, मुस्लिम समाज के विभिन्न संगठनों व विश्व वैश्य संघ, बाल भारती फाउंडेशन एवं ब्राह्मण युवा क्रांति मंच, जनसंघ सेवक मंच, विजयवर्गीय युवा संगठन आदि सहित बरकत नगर, वैशाली नगर, मानसरोवर, बजाज नगर, टोंक रोड़, जगतपुरा, मालवीय नगर, मुरलीपुरा, प्रताप नगर, दादी का फाटक, जौहरी बाजार, अजमेर रोड़, अजमेर, भीलवाड़ा, उदयपुर, जोधपुर, अलवर, भरतपुर, टोंक, किशनगढ़, कोटा, बीकानेर के स्थानीय व्यापारिक संगठनों और स्थानीय सामाजिक संगठनों आदि ने भी सोमवार 31 अगस्त को स्वेच्छिक बंद में शामिल होने की घोषणा की।

समिति के प्रवक्ता अरविंद अग्रवाल एवं मनोज शर्मा ने बताया कि “नो स्कूल नो फीस” की मांग के चलते प्रदेशभर में अभिभावक विभिन्न संगठनों से जुड़कर संघर्ष कर रहे थे। जिसे संयुक्त अभिभावक समिति ने एकजुट कर बिखरे संघर्ष को एक आवाज दी और सभी को जोड़कर एक लड़ाई बनाई। पांच माह से चल रहे इस संघर्ष को एकजुट करने के लिए समिति के पदाधिकारी स्कूल गए। स्कूल के प्रिंसिपल एवं प्रबंधन को ज्ञापन दिये, अभिभावकों को एकजुट किया और रविवार, 16 अगस्त को जयपुर के शिक्षा संकुल पर हाथों में फूल लिए करीब 90 स्कूलों के 350 प्रतिनिधि अभिभावको ने शांति पूर्ण प्रदर्शन किया। इससे पूर्व 6 जुलाई को प्रदेशभर के 150 से भी अधिक स्थानों पर चौराहों पर विरोध प्रदर्शन भी किया गया था।

कोषाध्यक्ष संजय गोयल ने बताया कि इतने विरोध प्रदर्शन के बावजूद भी राज्य सरकार के कानों में एक भी जू नही रेंगी और ना ही अभिभावको की मांगों पर ध्यान दिया गया। सरकार की चुपी का फायदा उठाकर निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर लगातार फीस जमा करवाने का दबाव बनाया गया, धमकियां दी गई, डराया गया जो आज भी जारी है और पूरी तरह से अनैतिक है।

प्रवक्ता मनमोहन सिंह एवं मीडिया संयोजक अभिषेक जैन बिट्टू ने जानकारी देते हुए बताया कि यदि अभिभावको की पीड़ाओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो प्रदेश के डेढ़ करोड़ से अधिक अभिभावक बिल्कुल भी चुप नही बैठेंगे और राज्य सरकार से अपना हक लेकर रहेंगे। राज्य सरकार अपनी हठधर्मिता का प्रदर्शन कर इस विपदा की घड़ी में भी अभिभावकों को सड़कों पर संघर्ष करने पर मजबूर कर रही है। सरकार के रवैये से अभिभावकों में घोर निराशा है। जिसके चलते सरकार के प्रति अभिभावक आक्रोशित है। अभिभावकों ने तय किया है कि अगर राज्य सरकार ने अभिभावकों की पीड़ा को नहीं समझा तो आगामी निगम चुनावों ने सत्तारूढ़ पार्टी को सबक सिखाएंगे। राज्य की सरकार अपने मुख्य उद्देश्य जनहित कार्य से पीछे हटकर जनता विरोधी कार्य कर रही है। जहां इस विपदा की घड़ी में जनता को राहत देनी चाहिए वही महंगाई के गिफ्ट बांटे जा रहे है।

जयपुर व्यापार मंडल के अध्यक्ष ललित सिंह सांचौरा ने कहा है कि एक व्यापारी भी अभिभावक है, वर्तमान में परिस्थिति बहुत विकट है राज्य सरकार को अपना दायित्व निभाते हुए अभिभावकों को राहत प्रदान करनी चाहिए। व्यापारियों का व्यापार अभिभावकों से जुड़ा है पिछले 6 महीनों से लगातार व्यापार घट रहा है, जिसे साफ प्रतीत होता है कि प्रदेश का अभिभावक वाकई में पीड़ित है। आज जिस प्रकार निजी स्कूल पूरी फीस वसूलने का दबाव बनाकर अभिभावकों को प्रताड़ित कर रहे है वह अति अशोभनिय है। केवल जयपुर का ही नही अपितु प्रदेश का प्रत्येक व्यापारी अभिभावकों के साथ खड़ा है और सोमवार को प्रातः 9 से 1 बजे तक अपनी दुकानें एवं व्यावसायिक स्थल स्वेच्छिक बंद रखकर अभिभावकों को पूर्ण समर्थन प्रदान करेगा। वैशाली नगर व्यापार मंडल समिति महासचिव डॉक्टर वीरेंद्र सिंह राघव एवं संस्कृति सचिव दीपक पँवार ने भी सभी व्यापारियों से अपील की।

राजपूत श्री करणी सेना राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि प्रत्येक समाज की नैतिक जिम्मेदारी समाज का उद्धार करना बनती है। किन्तु आज इस विपदा की घड़ी में प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश का प्रत्येक परिवार पीड़ित और प्रभावित है। ऐसे में पूंजीपति स्कूल मालिकों के द्वारा अभिभावको अनैतिक दबाव बना कर अपमानित करना, बच्चो को फीस जमा नही होने पर टीसी देकर निकालने की धमकी देना, बर्दास्त करने लायक नही है। शिक्षा के मंदिर शिक्षा देने के लिए बने है ना कि व्यापार करने के यदि निजी स्कूल संचालक और राज्य सरकार ने अभिभावकों के प्रति अपना रवैया स्पष्ट नही किया तो दुष्परिणाम भुगतने होंगे।

दी एम्प्लोर्स एसोसिएशन राजस्थान के अध्यक्ष नरेंद्र जैन ने कहा कि कोरोना संक्रमण संकट का 6 माह पूर्व जो नौकरी पर था वह आज बेरोजगार घूम रहा है। ऐसी स्थिति में प्राइवेट कर्मचारी अपने परिवार का भरण पोषण नहीं कर पा रहा है, वह फीस कहा से जमा करवाएगा। दी एम्प्लोर्स एसोसिएशन राजस्थान इस विपदा की घड़ी में अभिभावको के साथ है और सोमवार को स्वेच्छा से राजस्थान बन्द में शामिल होकर अपनी की सभी इंडस्ट्रीज बंद रखकर अभिभावकों का साथ देंगे।

किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि किसान महापंचायत सहित राज्य के सभी 50 किसान संगठन अभिभावकों के आत्मसम्मान की लड़ाई में साथ खड़े है और राजस्थान बंद में शामिल होंगे “जाट ने कहा कि प्रदेश का किसान भी अभिभावक है उसके भी बच्चे है, किसान पूर्व से ही सरकार की नीतियों से पीड़ित है ऐसे में कोरोना संक्रमण से किसानों पर भी दोहरी मार पड़ी है।” जब अन्न देने वाला किसान ही पीड़ित है तो लेने वाले अभिभावक की क्या स्थिति होगी उससे प्रदेश का प्रत्येक नागरिक भलीभांति परिचित है। अभिभावकों की मांग जायज है “जब स्कूल खुले ही नही तो फीस क्यो जमा करवाये।” राज्य सरकार को अभिभावकों को इस विपदा की घड़ी में राहत प्रदान करनी चाहिए और निजी स्कूल संचालकों पर लगाम लगानी चाहिए।

राजस्थान दुकानदार महासंघ प्रदेश अध्यक्ष किशोर कुमार टांक ने भी अभिभावको के समर्थन में प्रदेशभर के सभी दुकानदार व्यापारियों से बन्द में शामिल होने की अपील की।

जयपुर डिस्ट्रिक बार एसोसियेशन अध्यक्ष डॉ सुनील शर्मा, सेशन कोर्ट बार एसोसिएशन सचिव सतीश शर्मा और सांगानेर बार एसोसिएशन सचिव द्वारा भी सभी वकीलों की तरफ से अभिभावकों को समर्थन दिया गया है। सोमवार को सभी वकील प्रातः 9 बजे से 1 बजे तक कार्य का बंद रखकर समर्थन देंगे। प्रदेशभर के सभी वकीलों को अभिभावकों के समर्थन में स्वेच्छिक राजस्थान बन्द करने की अपील भी जारी की, साथ व्यापारियों से भी अपील की।

30 प्रदेशभर में व्यापारियों को फूल भेंट कर करेगे निवेदन

संयुक्त अभिभावक समिति ने पत्रकार वार्ता के दौरान जानकारी दी कि रविवार को राज्य का प्रत्येक अभिभावक अपने नजदीकी व्यापारी को फूल भेंट कर “राजस्थान बन्द” के लिए समर्थन मांगेगा।

31 जुलाई को ऑनलाइन क्लासेस भी बंद

अभिभावक समिति ने अभिभावकों से कहा है सोमवार 31 अगस्त को कोई भी अभिभावक अपने बच्चों को ऑनलाइन क्लास भी अटेंड नहीं करवाएगा। सोमवार को सम्पूर्ण बाजार बंद रहेगा तो यह ऑनलाइन शिक्षा का बाजार भी बन्द होगा।