सुजानगढ़ में चल रही उत्तर भारत की सबसे बड़ी तिरपाल मंडी किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। किसान नहरी पानी, ट्यूबवेल और बरसाती पानी की छोटी बड़ी डिग्गियां तिरपाल से बनाकर पानी का स्टोरेज करते हैं। खेतों में सिंचाई के लिए डिग्गी तिरपाल से बनी डिग्गियां पक्की डिग्गियों की बजाय 10 प्रतिशत कीमत में ही बन जाती है।

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ऐसे में राजस्थान के अलावा कई राज्यों के किसान सुजानगढ आकर डिग्गी तिरपाल लेकर जाते हैं। इन तिरपालों से किसान साल के ना सिर्फ लाखों रुपए बचा रहे हैं बल्कि अनमोल पानी की भी बर्बादी ना होकर बचत हो रही है। खींची एग्रो तारपोलिन के अब्दुल सलाम ने बताया कि उत्तर भारत के कई राज्यों सहित राजस्थान भर के किसान यहां आकर अपनी मनपसन्द साइज, क्वालिटी और कलर के डिग्गी तिरपाल बनवा कर ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि हम 10 फीट गुणा 10 फ़ीट से लेकर 300 गुणा 300 फीट तक के डिग्गी तिरपाल बनाते हैं। आधुनिक मशीनों से ये तिरपाल मात्र 4 घन्टे में तैयार हो जाते हैं और इन्हें डिग्गी में फिट करने में भी सिर्फ एक घण्टा लगता है। इस तकनीक से किसानों का पैसे के साथ समय भी बच रहा है। व्यवसायी अब्दुल सलाम ने बताया कि मछली पालन करने वाले के लिए फिश फार्मिंग में काम आने वाले गोल डिग्गी टैंक के लिए भी भारत भर से लोग यहां आते हैं। खींची एग्रो के रफीक खींची ने कहा कि किसानों के लिए बनाए जाने वाले तिरपालों पर हम नाममात्र का मुनाफा कमाते हैं। देश के किसानों की समृद्धि के लिए हम खास तौर पर इन तिरपालों का उत्पादन करते हैं। जैसलमेर के भारेवाला गांव से अपनी डिग्गी के लिए तिरपाल खरीदने आए किसान गजानन्द पारीक ने बताया कि किसानों के लिए यह तिरपाल बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है। किसानों को बहुत कम लागत में यहां मनपसन्द तिरपाल मिल जाता है। वहीं नाचना, जैसलमेर के किसान इकबाल खाँ ने कहा कि मैं यहाँ मेरी 60 हजार स्क्वायर फीट की डिग्गी के लिए तिरपाल लेने आया हूँ। इससे पैसे के साथ ही पानी की भी बहुत बचत हो रही है। सुजानगढ़ की तिरपाल मंडी निसंदेह किसानों व मच्छलीपालन करने वाले के लिए वरदान साबित हो रहें हैं।