जयपुर|Mahima Jain:जनरल बिपिन रावत का इस तरह दुनिया को अलविदा कहना सभी को अचंबित कर गया ऐसे में जानना जरूरी हो जाता है की देश को हमेशा कैसे उन्होंने सर्वोपरि रखा।रावत का सर्जिकल स्ट्राइक में बड़ा रोल था। साथ ही उन्होंने UN फोर्सेज के साथ कॉन्गो में कमांड भी संभाली। सर्जिकल स्ट्राइक के वक्त जनरल रावत वाइस चीफ ऑफ दी इंडियन आर्मी के पद पर थे। मिलिट्री ऑपरेशंस की शाखा डायरेक्ट वाइस चीफ के अंडर में काम करती है। सर्जिकल स्ट्राइक की प्लानिंग और एक्जीक्यूशन में विपिन रावत का बहुत बड़ा रोल रहा है। उन्होंने आर्मी के ऑपरेशन की जिम्मेदारी संभाली थी। जनरल बिपिन रावत जमीन से जुड़े हुए और सादा जीवन जीने वाले सैन्य अफसर थे। वो सही मायने में और सही तरीके से पहले सीडीएस चुने गए।

Bipin Rawat Bipin Rawat

ट्रेनिंग में मिला स्वॉर्ड ऑफ ऑनर

जब विपिन रावत मिलिट्री एकेडमी में ट्रेनिंग कर रहे थे। तो उन्हें स्वॉर्ड ऑफ ऑनर प्राप्त हुआ। यह उस जेंटलमैन कैडेट को दिया जाता है, जिसकी ओवरऑल ऑलराउंडर बेस्ट परफॉर्मेंस होती है। जब से वो आर्मी में आए हमेशा टॉप पर रहे। उन्होंने हर रैंक पर फील्ड में एक्टिव ऑपरेशन देखे।

UN फोर्सेज के साथ कॉन्गो में ब्रिगेड कमांड करना बड़ी कामयाबी

जब रावत ने ब्रिगेड इंसर्जेंसी एरिया में कमांड किया। उसके बाद यूनाइटेड नेशंस फोर्सेस के साथ कॉन्गो में ब्रिगेड कमांड करने के लिए चुना गया। जोकि बहुत बड़ी कामयाबी मानी जाती है। स्पेशल वॉरफेयर में एक्सपर्ट को ही इस तरह के टास्क में चुना जाता है। जैसे ही बिपिन रावत कॉन्गो पहुंचे। 15 दिन में ही हमला हो गया। उसे जिस तरीके से उन्होंने उसे हैंडल किया। उसकी पूरी दुनिया ने तारीफ की।

विपिन रावत बहुत प्रफोशनल थे

रावत साउथर्न आर्मी में कमांडर थे, तब जोधपुर के इलाके में युद्धाभ्यास किया जा रहा था। ऐसे युद्धाभ्यास के दौरान आमतौर पर ऑपरेशनल इश्यूज को ज्यादा महत्व दिया जाता है। मेजर जनरल माथुर ने बताया कि हम लॉजिस्टिक्स से थे, लेकिन पहले ही दिन रावत ने अचानक कहा कि अब ऑपरेशन से जुड़े लोग एक तरफ हो जाइए। हम लॉजिस्टिक्स के बारे में बात करेंगे। यह देखकर लगा कि वो बहुत ज्यादा प्रोफेशनल हैं और सब कुछ समझते हैं। वो ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्हें पता था कि ऑपरेशनल प्लान के साथ लॉजिस्टिक्स भी उतना ही अहम है।

सेना में ऑपरेशन प्रोसेस की नस-नस से वाखिफ़

सीडीएस विपिन रावत को ऑपरेशन और सैन्य कार्रवाई का काम करने के प्रोसेस की नस-नस की जानकारी थी। उनका कोई कॉम्पिटिटिव नहीं था। उन्हें तजुर्बा बहुत जबरदस्त था। उन्होंने कमांड ब्रिगेड काउंटर इंसरजेंसी इलाके में कश्मीर में की। डिविजन बारामूला इलाके में किया। थ्री-कोर में उन्हें दीमापुर भेजा गया, जोकि पूरे नॉर्थ ईस्ट का काउंटर इंसर्जेसी ऑपरेशन का हेडक्वार्टर है। हर तरह के वॉरफेयर, ज्योग्राफिकल टेरेन और हर ऑपरेशनल एंवायर्नमेंट में उन्हें जबरदस्त तजुर्बा था, इसीलिए उन्हें अपने 2 साथियों को सुपरसीड करके पहले चीफ और फिर सीडीएस बनाया गया।