सरकार भीड़ इकट्ठा करे तो चमत्कार, जनता भीड़ इकट्ठा करे तो खतरनाक…

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मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी के चलते सरकार ने प्रशासन को हाई अलर्ट कर सोशल डिस्टेंस की पालना के लिए प्रतिबद्ध किया और यह सब कुछ करना जरूरी भी है। क्योंकि “जान है तो जहान है”। लेकिन हमेशा कि तरह देश में अक्सर नियम, कानून और कायदे सिर्फ आमजन के ऊपर ही थोपे जाते हैं। राजनेताओं व रसूखदारों का इन नियमों से कोई वास्ता नहीं होता है। एक ओर देश के प्रधानमंत्री देश में वन नेशन की सोच पर काम कर रहे हैं तो दूसरी ओर सरकार में बैठे सफेदपोश ही नियमों व कानून को अपनी अपनी सहूलियत के हिसाब से बनाते और बिगाड़ते हैं।

आपको बता दें कि देश में हाल ही में कोरोना वायरस के चलते कृष्ण जन्माष्टमी व गणेश चतुर्थी जैसे पर्व जहां एक ओर हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं को दर्शन से व ईद जैसे पर्व पर मुस्लिम समुदाय को मस्जिदों से वंचित होना पड़ा था। वहीं दूसरी ओर राजस्थान सरकार ने कई बार अपनी सरकार को बचाने के लिए कभी सैकड़ों की तादात में तो कभी हजारों की तादाद में भीड़ जुटा कोविड 19 के तहत बने कानून और नियमों को तोड़ने का काम किया था। जानकारी के मुताबिक सोमवार को बनीपार्क स्थित कांग्रेस युवा प्रदेश कार्यालय में नवीन प्रदेशाध्यक्ष गणेश के पदभार कार्यक्रम रखा गया। जहां राजस्थान सरकार के मुखिया अशोक गहलोत, युवा वर्ग के मंत्री अशोक चांदना, शिक्षा विभाग के मंत्री गोविंद डोटासरा जैसे गणमान्य लोगों की मौजूदगी में हजारों की संख्या में मौजूद भीड़ कोविड 19 नियम व कानून का कानून के रखवालों के सामने मखोल उड़ा रही थीं।

बड़ी विडंबना की बात है कि एक राज्य का मुखिया लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीच अपनी सरकार का जनता के सामने नाजायज फायदा उठा कर जनता को आहत कर रहा है और अगर हम बात करे आमजन की तो दुकान पर बैठे दुकानदार के मास्क नहीं होने की वजह से भी चालान काट दिए जाते हैं। क्या कोरोना वायरस भी राजनेताओं से दूर ओर जनता के बीच रहता है? या फिर राजस्थान सरकार ने अपने लिए अलग और जनता के लिए अलग नियम और कानून बना रखे हैं।