सट्टा पर्ची का अवैध कारोबार जोरो शोरो पर, पुलिस नहीं लगा पा रही है सटोरियों पर लगाम

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मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। पूरा देश जहां कोरोना महामारी से निपटने में लगा हुआ है। वहीं घड़साना में सटोरिये लगे है 1 कि 9 करने में। आज हर वर्ग कोरोना महामारी से लड़ रहा है वहीं कुछ सटोरियो गरीबो मजदूरों को बहला फुसलाकर कर सट्टे की दलदल में झोंक चुका है। शॉर्टकट में पैसा कमाने का सपना आज आम वर्ग को कहाँ से कहाँ ले जाये ये कोई अंदाज़ा नही लगा सकता है। सट्टे पर्ची में एक का नो पैसा कमाने के लिए आज का वर्ग अंगुलियों पर अजब गजब गणित लगा रहा है।

नम्बरो के इस खेल में एक लक्की नम्बर को तलाशने के लिए हर चीज में जोड़, घटाव, गुणा, भाग करते है। यहां तक की सपने में कोई नम्बर दिख जाए तो खेलने वाले उस पर भी ढ़ेरो पैसा लगाते है। खेलने वाले सुबह से शाम की सारी मेहनत 1 में 9 के चक्कर में झट से लगा देता है और खिलाने वाला सभी नम्बरो में सबसे कम रकम लगने के बाद यह देखता है कि किस नम्बर पर सबसे कम पैसा लगा है जोड़ घटाव कर उस नम्बर को खुलवा दिया जाता है। जिसका नम्बर लग जाता है उनका लालच अगली रकम के लिए बरकरार रहता है और जिसका नही लगता वह फसे पैसे को निकालने के चक्कर मे फंसा रहता है। यहाँ आज इस सट्टे पर्ची का कारोबार इतना ज्यादा हो गया है कि आज क्षेत्र में सट्टा बड़े स्तर पर गली गली तेजी से फल फूल रहा है। बड़ी ही चिंताजनक बात है कि आज का युग जहाँ टेक्नोलोजी का युग बनता जा रहा है।

वहीं आज इन बुराइयों ने युवा वर्ग को अंदर से खोखला बना दिया है। सट्टा और बुकी का कारोबार सरेआम चल रहा है और पुलिस प्रसासन के नाक के नीचे ये कारोबार चल रहा है ना जाने कितने परिवार इस दलदल में धस चुके है और कितने इसमे बर्बाद होंगे। युवा पीढ़ी और आम परिवारों की इस दयनीय स्थिति को बचाने के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने के साथ ही ठोस कार्यवाही करनी चाहिए। हालांकि पुलिस की तरफ से कुछ कार्यवाही हुई है। लेकिन घड़साना में सट्टा पर्ची के पड़े मगरमच्छ आज भी बेधड़क अवैध काम करने में लगे है। मानो उन्हें पुलिस का कोई भी भय नही है।