डेस्क न्यूज़ | विंग कमांडर राजेंद्र कुमार शारदा का पार्थिव शरीर उनके परिवार ने अंतिम इच्छा के अनुसार एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर को दान कर दिया।
विंग कमांडर स्वर्गीय आर के शारदा की पुत्री सुश्री अपर्णा गुप्ता ने बताया कि वयोवृद्ध वायु सेना अधिकारी की इच्छा थी कि उनके शरीर का अंतिम संस्कार नहीं किया जाए और उन्हें राख में नहीं डाला जाए l उनके निधन के बाद मानव जाति के अधिकतम लाभ के लिए दान कर दिया जाए।

विंग कमांडर शारदा का 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह भारतीय वायु सेना में फ्लाइट इंजीनियरों के पहले बैच का हिस्सा थे और उन्होंने पैकेट विमान और आईएल-76 में सेवा की। जमीन पर रहते हुए वह कॉम स्क्वाड्रन सहित विभिन्न स्टेशनों पर वरिष्ठ अभियंता और मुख्य तकनीकी अधिकारी थे l

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जो सभी वीआईपी विमानों के लिए जिम्मेदार थे। उन्होंने करियर में बहुत पहले ही इंजीनियर के तौर पर 5 साल की उड़ान भी कर ली थी l फिर विंग कमांडर बनने के बाद इसमें वापस चले गए। उन्होंने 1965 और 1971 दोनों युद्धों में देश सेवा करते हुए पराक्रम दिखाया।भारतीय वायु सेना में फ्लाइट इंजीनियरों के पहले बैच का हिस्सा थे शारदा l