कोटा- सांगोद ब्लॉक के पंचायत सहायक धर्मेंद्र कुमार लगातार कोरोना ड्यूटी व अन्य सरकारी कामों को करते करते संक्रमित हो गया है जो आज भारत विकास परिषद अस्पताल कोटा नाजुक हालत में भर्ती हैं लड़ रहा है। जिलाध्यक्ष भरत यशवसी का कहना है कि हर सरकारी कार्य व सर्वे में सरकार के कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले अल्पमानदेय भोगी पंचायत सहायक संविदा कार्मिकों का सरकार में कोई धणी धोरी नहीं है।

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तभी तो वर्तमान में फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स बनकर भी ये संविदा कार्मिक राजस्थान सरकार द्वारा खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं ।राजस्थान में लगभग 14 वर्षों से संविदा कार्मिकों का सबसे बड़ा तबका पंचायत सहायक आज खुद को ठगा महसूस कर रहा है उसका कारण स्पष्ट रूप से देखा जाए तो सरकार की उदासीनता ही है जो आज इन अल्पमानदेय भोगी पंचायत सहायकों की जान जोखिम में डालकर नियमित कार्मिकों की जगह इन संविदा कार्मिकों से अपना खजाना बचाने के लिए बिना अतिरिक्त परिलाभ दिये काम करने के लिए ड्यूटी लगाई जा रही है । अक्सर देखा जाए तो इसे संविदा कार्मिकों की बदकिस्मती कहे या मजबूरी जो इतने कम अल्पमानदेय मे भी अपना फर्ज बखूबी निभा रहे हैं जहां इस कोविड वेक्सीनेशन ड्यूटी मे बिना किसी दिखावे के अपनी जान की परवाह किए बगैर बिना सरकारी संसाधनों व अतिरिक्त परिलाभ के विगत दो माह से ड्यूटी कर रहे हैं और संक्रमण झेल रहे हैं ।इस काल मे राजस्थान के लगभग सात संविदा कार्मिक पंचायत सहायक सहित अपनी जान गंवा भी चुके हैं जिनके परिवार की सुध लेने वाला भी कोई नहींराजस्थान में संविदा कार्मिकों का बहुत बड़ा तबका है जिसमें राजस्थान विधार्थी मित्र पंचायत सहायक संघ बड़ा तबका है जिसमें पंचायत सहायक पंचायतों से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों में, विभिन्न सर्वेक्षणों, बीएलओ, चुनावी ड्यूटी, कंट्रोल रूम व जनगणना मे पंचायत सहायक बिना अतिरिक्त परिलाभ के ड्यूटी दे चुके वहीं वर्तमान में कोविड वेक्सीनेशन मे ड्यूटी दें रहे हैं लेकिन विडंबना है कि आज भी ये उपेक्षित महसूस कर रहे हैं ।चुनावी घोषणा पत्र अनुसार सरकार ने पंचायत सहायकों सहित अन्य संविदा कार्मिकों की मांगों का समाधान कर नियमित करने का वादा किया परंतु ये सब मांगे आज भी अधूरी है।अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता मानसिक तनाव सहित ड्यूटी का तनाव झेलने पर मजबूर ये कार्मिक कभी कभी तो इतने तनाव ग्रस्त हो जाते हैं कि इनकी पीडा को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता अल्पमानदेय मे कैसे चले परिवार 6000 रूपए मासिक मानदेय पर विभिन्न प्रकार के कार्य करने को मजबूर ये पंचायत सहायक अपनी किस्मत पर रो रहे हैं क्योंकि सरकार ने चुनावी घोषणा पत्र अनुसार मांगों का समाधान कर नियमित करने का वादा किया था जो आज भी अधूरा है वही नियमित तो दूर सम्मानजनक मानदेय वृद्धि भी सरकार इन दो साल में नहीं कर पाई जिसकी पीडा इन्हें सताती है Iकोई अतिरिक्त परिलाभ नहींराजस्थान विधार्थी मित्र पंचायत सहायक संघ जिला कोटा संयोजक नरोत्तम नागर का कहना है कि इसे इनका दुर्भाग्य कहें कि बदकिस्मती सरकार के हर कार्य में सहयोग करने वाले अल्पमानदेय भोगी पंचायत सहायक संविदा कार्मिकों को सरकार द्वारा कोई अतिरिक्त परिलाभ नहीं दिया जा रहा है ड्यूटी कही भी कभी भी लगाई जाये लेकिन बिना किसी अवकाश व अतिरिक्त परिलाभ के हर जगह इन कार्मिकों को बलि का बकरा बनाया गया है जो कि इनके साथ अन्याय है जबकि सरकारी कार्मिकों को उपार्जित अवकाश के साथ कई सुविधाएं मिलती है इस संक्रमण के दौर में सभी को खुद की और परिवार की चिंता रहती है वहीं काम के बोझ तले पंचायत सहायक इतने कम मानदेय में खुद का और परिवार का सही तरीके से इलाज भी नहीं करा सकते ऊपर से कई जिम्मेदारियां है ।सरकार को इन अल्पमानदेय भोगी पंचायत सहायकों की पीडा को समझते हुए चुनावी घोषणा पत्र अनुसार मांगों का समाधान करते हुए नियमितीकरण करना चाहिए ताकि ये भी अपने परिवार का सही तरीके से पालन पोषण कर सके और सम्मानजनक जीवन जीने के हकदार बने।चौदह वर्षों से संघर्षरत इन संविदा कार्मिकों के साथ सरकार को अब न्याय करना चाहिए ।

रिपोर्टर – लोकेश मालव