रेमडेसिविर की कालाबाजारी के आरोप में डॉ. जितेश को 21 मई को गिरफ्तार किया गया था। कोरोना महामारी में रेमडेसिविर इंजेक्शन की काला बाजारी करने वाले फरीदाबाद के डॉ. जितेश अरोड़ा और उसकी गैंग का जयपुर में एक और काला कारनामा सामने आया है। इस गैंग ने कोरोना मरीजों के उपचार के लिए 1000 से ज्यादा रेमडेसिविर इंजेक्शन कोरोना मरीजों को बेचे थे। ये सभी नकली थे। यह खुलासा जयपुर में सेठी कॉलोनी स्थित ड्रग डिपार्टमेंट की सेंट्रल लैब ने अपनी जांच रिपोर्ट में किया है। रिपोर्ट में दावा है कि कोतवाली थाना पुलिस ने कालाबाजारी करने वाली गैंग सदस्य रामावतार यादव के कब्जे से जो रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद किया था। उसे सेंट्रल लैब में टेस्टिंग के लिए भेजा गया था। सामने आया कि इंजेक्शन में रेमडेसिविर दवा नहीं पाई गई है। रिपोर्ट आने के बाद कोतवाली थाना पुलिस ने बुधवार को पहले से दर्ज मुकदमे में ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट की धारा 27 ए भी जोड़ दी है। इसमें 10 साल की सजा प्रावधान है। फिलहाल तीनों आरोपी जयपुर जेल में हैं।