राजस्थान में कार कैरियर ट्रांसपोर्ट उधोग पर मंडराता संकट राज्य सरकार की अवैध चालान वसूली से ट्रांसपोर्ट उधोग बर्बादी की कगार पर….

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मरुधर बुलेटिन न्यूज़ डेस्क | जयपुर/अलवर/उदयपुर/कोटपूतली। प्रदेश में राज्य सरकार की अनदेखी एवं परिवहन विभाग की मनमानी से अवैध चालान वसूली के कारण ट्रांसपोर्ट उधोग बर्बादी की कगार पर खड़ा हैं। वैश्विक महामारी कोरोना के इस दौर में विशेष रूप से कार कैरियर ट्रांसपोर्ट उधोग पर संकट मंडरा रहे हैं। राजस्थान की अन्य प्रदेशों से लगने वाली सीमाओं पर एन्ट्री चालान के नाम से राज्य सरकार के प्रादेशिक परिवहन अधिकारी (आरटीओ) द्वारा 10 हजार से लेकर 40 हजार तक के चालान अवैध व नियम विरूद्व तरीके से काटे जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि विशेष रूप से दिल्ली-जयपुर राजमार्ग स्थित शाहजहाँपुर बॉर्डर व चितौडग़ढ़, उदयपुर एवं डुंगरपुर के बॉर्डर जो राजस्थान को मध्यप्रदेश व गुजरात से जोड़ते हैं आदि जगहों पर ज्यादातर कार कैरियर कन्टेनरों का आवागमन होता हैं।

दुनिया भर में जारी कोरोना संकट से खड़े आर्थिक सुनामी के इस दौर में राज्य सरकार की गलत नीतियों के चलते कार कैरियर क न्टेनरों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही हैं। एक ओर ऑटोमोबाईल क्षेत्र में वाहनों की बिक्री कम होने से कार कैरियर कंटेनरों के फेरे कम हो रहे हैं। वहीं डीजल की किमतें बढ़ गई है एवं किराया भी पूरा नहीं मिल रहा हैं। जिसका सीधा-सीधा असर ट्रांसपोर्टरों की आय पर पड़ रहा हैं। प्रदेश में एक बार घुसने पर एन्ट्री चालान 5 हजार से बढ़ाकर 10, 20 व 40 हजार तक का काटा जा रहा हैं। कार कैरियर एशोसिएशन के अध्यक्ष विपुल नन्दा ने बताया कि दिल्ली से जयपुर तक एक कन्टेनर को 20 से 25 हजार रूपयों का किराया मिल पाता है जिसमें से 14 हजार रूपयों की राशि डिजल, ड्राईवर समेत अन्य खर्चो में चली जाती हैं। इसके अलावा अवैध एन्ट्री चालान से कमाई की बजाय निरन्तर नुकसान हो रहा हैं।

मीडिया सचिव विक्रम गुप्ता ने बताया कि एशोसिएशन की माँग पर भारत सरकार ने 7 अक्टुबर 2016 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर कार के यर कंटेनरों के नियम तय करते हुए कंटेनरों की लम्बाई 22 मीटर से घटाकर 18.75 मीटर कर दी गई थी। जिसके पूर्व राजस्थान में प्रत्येक एन्ट्री पर चालान राशि मात्र 1500 रूपये थी। लेकिन राज्य सरकार ने इसे कम करने की बजाय बढ़ाकर 5 हजार रूपये कर दिया था। जबकि कंटेनर पहले की तुलना में 10 के स्थान पर 8 वाहनों को ही लेकर जा पा रहे थे। इससे ट्रांसपोटर्स के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। उक्त कार्यवाही केवल कार केयर को लेकर ही की गई। पूर्व में भी कई बार इस सम्बंध में राज्य सरकार से एशोसिएशन ने निवेदन किया लेकिन किसी ने उनकी एक नहीं सुनी। वर्ष 2018 में प्रदेश में कांग्रेस सरकार आने के बाद नई उम्मीद जगी थी। लेकिन नतीजा जस का तस रहा। राजस्थान में नये मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन के बाद एक एन्ट्री पर 10 से 40 हजार रूपये का एन्ट्री चालान काटा जा रहा हैं। जबकि ट्रांसपोटर्स द्वारा किसी भी कानुन का उल्लंघन नहीं किया जा रहा हैैं।

मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कार्यवाही की माँग :- प्रदेश के ट्रांसपोर्टर अमित चन्दवार व ओम अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री समेत मुख्य सचिव, ट्रांसपोर्ट कमिश्नर व भारतीय ऑटोमोबाईल निर्माता सोसायटी को ज्ञापन भेजकर इन अवैध चालान को रोके जाने की माँग की गई हैं। राज्य सरकार पूर्णतया: नियमों के तहत चल रहे कार कंटेनर्स को बिना किसी कारण के सडक़ों पर खड़ा करने के लिए मजबुर कर रही हैं। ज्ञापन में चेतावनी दी है कि अगर इस मामले में जल्द ही कोई कार्यवाही नहीं हुई तो राजस्थान समेत देश भर में कार कंटेनर्स चक्का जाम प्रदर्शन पर मजबुर होगें। वहीं जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एशोसिएशन ने भी इस सम्बंध में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ज्ञापन भेजकर ट्रांसपोटर्स के साथ न्याय किये जाने की माँग की हैं।