मुख्यमंत्री राहत कोष से चंबल नदी हादसे में मृतकों को 1-1 लाख रुपये सहायता राशि देने की घोषणा

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मरूधर बुलेटिन न्यूज डेस्क। कोटा जिले की सीमा के आखिरी क्षेत्र खातौली क्षेत्र के गोठड़ा गांव में बुधवार सुबह एक नाव चम्बल नदी में डूब गई। इस नाव में 50 से अधिक लोग सवार थे। साथ ही ग्रामीणों की मोटरसाइकिलें भी इस नाव में रखी हुई थे। कई लोगों के नदी में डूबने की आशंका है। नाव में महिलाएं और बच्चे भी सवार थे। समाचार लिखे जाने तक करीब 11 शव बरामद किए जा चुके हैं और शवों की तलाश जारी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश पर जिला कलेक्टर उज्जवल राठौड़ ने मृतक आश्रितों को तत्काल सहायता के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष से एक—एक लाख रुपए की सहायता राशि जारी की गई है।

घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और अपने स्तर पर बचाव व राहत कार्य में जुटे हुए है। पुलिस और प्रशासन भी मौके पर पहुंच गया है। हादसे की सूचना मिलने पर कोटा से भी बचाव और राहत दल रवाना हो गए हैं। जिला कलक्टर और एसपी ने हादसे की जानकारी ली और आला अधिकारी मौके के लिए रवाना हो गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार नाव में 50 से अधिक लोग सवार थे। जो गोठड़ा गांव से चम्बल नदी पार कर रहे थे। अचानक नाव असन्तुलित हो गई और पानी भरने लग गया।

नाव को डूबता देखकर इसमें सवार लोग चम्बल नदी में कूद गए थे। इसके बाद नाव भी पानी में डूब गई है। जो लोग तैरना जानते थे, वह तैरकर नदी से बाहर आ गए हैं। अभी तक यह पता नहीं चला कि कितने लोग नदी में डूबे हुए हैं। मौके पर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौके पर है। लोगों की तलाश युद्ध स्तर पर जारी है।

इस दुखान्तिका पर लोक सभा स्पीकर ओम बिरला ने भी चिंता जताई है। लोकसभा सचिवालय ने जिला प्रशासन से इस संबंध में संपर्क साधा और कोटा से एसडीआरएफ टीम को मौके के लिए रवाना करवाया है। यूडीएच मंत्री शांति कुमार धारीवाल स्थानीय विधायक रामनारायण मीणा ने भी कोटा कलेक्टर से दूरभाष पर वार्ता कर घटना की जानकारी ली और बचाव और राहत कार्य त्वरित गति से करने के निर्देश दिए।
घटनाय स्थल पर किसी तरह से महिलाओं और बच्चों को किनारे तक लाने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं थी। इसके लिए प्रशासन ही जिम्मेदार माना जा रहा है। क्योंकि इस तरह से अवैध रूप से नावों का संचालन तो किया जा रहा है। लेकिन किसी भी प्रकार हादसे से बचाव के लिए कोई उपकरण या टीम वहां पर तैनात नहीं है।